Sunday, May 19, 2013

सकारात्मक नजरिए के साथ जाएं परीक्षा देने



परीक्षा की तिथि - 26 मई, 2013
चन्द दिनों बाद सिविल सेवा की प्रारम्भिक परीक्षा है। प्रारम्भिक परीक्षा के अंतर्गत जीएस और सीसैट के रूप में दो पेपर आयोजित किए जाते हैं। दोनों पेपर एक ही दिन होते हैं। इस परीक्षा में महज विषयगत तैयारी के बल पर सफलता हासिल नहीं की जा सकती, बल्कि सकारात्मक सोच, सही रणनीति और बुलंद हौसला उम्मीदवार को आसानी से लक्ष्य तक पहुंचा सकता है। सिविल सेवा के प्री व मेन्स में सफल होने के बाद उम्मीदवार आईएएस, आईपीएस, आईएफएस व आईआरएस पद के लिए योग्य होते हैं।
बहुविकल्पीय होंगे सीसैट के प्रश्न
दूसरा पेपर सामान्य अभिरुचि (एप्टीट्य़ूड) का होता है। इसे सीसैट के नाम से जाना जाता है। इसमें कुल 80 प्रश्न पूछे जाते हैं। इसके लिए कुल 200 अंक निर्धारित हैं और उनके लिए दो घंटे का समय दिया जाता है।
प्रश्न डाटा इंटरप्रिटेशन, कम्युनिकेशन स्किल्स, प्रॉब्लम सॉल्विंग, डिसीजन मेकिंग, लॉजिकल रीजनिंग, मानसिक योग्यता, एनालिटिकल एबिलिटी आदि पर आधारित होते हैं। इसमें पूछे जाने वाले प्रश्न भी बहुविकल्पीय होते हैं। प्रत्येक प्रश्न के लिए ढाई अंक निर्धारित हैं।
40 प्रतिशत प्रश्न कॉम्प्रिहेंशन से
पूर्व के आंकड़ों के अनुसार सीसैट में कुल प्रश्नों का लगभग 40 प्रतिशत कॉम्प्रिहेंशन से संबंधित होता है। इसमें पांच श्रेणियों में परिच्छेद दिए होते हैं। इस परिच्छेद को पढ़ते हुए प्रश्नों का उत्तर लिखना होता है। इसे हल करते समय परिच्छेद के मूल विचार को ध्यान में रखें। बिना समझे इसे पढऩा पूरी तरह से समय की बर्बादी है। परिच्छेद पढऩा शुरू करने से पहले सवालों पर गम्भीरता से नजर डालें और क्या पूछा जा रहा है, इसकी पहचान करें।
सही तर्क करने की हो क्षमता
एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर उम्मीदवार को आगे चल कर कई प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में तत्काल निर्णय लेने की क्षमता एवं तार्किक गुण उसके लिए बहुत जरूरी है। ऐसे प्रश्नों को तभी हल किया जा सकता है, जब आप स्वयं को प्रभावी अधिकारी के तौर पर देखें और निष्पक्ष रूप से निर्णय लेने की क्षमता रखें। इसमें अधिकांश प्रश्न भारतीय संदर्भ पर आधारित होते हैं। साथ ही इसमें कारक का प्रयोग, दिए गए तथ्यों से निष्कर्ष या न्याय संगत कथन बनाना तथा साक्ष्यों आदि का प्रयोग शामिल है। तार्किक शक्त का मुख्य उद्देश्य दी गई स्थिति के अनुसार उम्मीदवार की समझ एवं विश्लेषण क्षमता को जांचना है।
मानसिक योग्यता से जुड़े प्रश्न महत्वपूर्ण
सामान्य मानसिक योग्यता के खंड में मौखिक तार्किकता संबंधी प्रश्न शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य व्यक्ति की संरचनात्मक चिंतन क्षमता तथा उसकी तार्किक विश्लेषण क्षमता को मापना होता है। इन प्रश्नों को हल करने के लिए उम्मीदवार को किसी औपचारिक या विशिष्ट नियम को सीखने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि इसके लिए मात्र सहज ज्ञान (कॉमन सेंस) एवं विश्लेषणात्मक बौद्धिकता की आवश्यकता होती है। निरंतर अभ्यास से भी इन प्रश्नों को हल करने की गति बढ़ाई जा सकती है।
इस सेक्शन से पूछे जाने वाले प्रश्नों में सादृश्यता, रक्त संबंध, दिशा-निर्देश, कोडिंग-डीकोडिंग पहेली आदि शामिल होते हैं।
अंग्रेजी व्याकरण पर दें ध्यान
अंग्रेजी के सेक्शन में उम्मीदवार को अंग्रेजी व्याकरण की पुस्तकों का उपयोग तथा खूब सारे शब्दों को रटने की जरूरत नहीं होती। पढ़ी जाने वाली अवधारणा को कुछ इस तरह से तैयार किया जाता है कि इससे उम्मीदवार की पैसेज पढऩे की क्षमता का पता चल सके। साथ ही उसमें दिए गए तथ्यों को समझने तथा पढ़े गए तथ्यों के आधार पर अनुमान निकालने की योग्यता का परीक्षण हो सके।
आधारभूत गणना की करें तैयारी
आधारभूत गणना में संख्याओं, उनकी विशेषता और आंकड़ों के विश्लेषण से जुड़े प्रश्न आते हैं। इसके जरिए उम्मीदवार की संख्यात्मक क्षमता और गणितीय गणना की सटीकता का परीक्षण किया जाता है। विभिन्न आंकड़ों तालिका, ग्राफ, चार्ट इत्यादि के माध्यम से दिए जाते हैं। आधारभूत गणना की तैयारी के लिए सबसे पहले छठी से 10वीं तक के एनसीईआरटी के गणित के सवालों को हल करना चाहिए। उन्हें सूत्रों के सहारे आसानी से हल किया जा सकता है।
निगेटिव मार्किंग का प्रावधान
इस परीक्षा में निगेटिव मार्किंग का भी प्रावधान है। गलत उत्तर दिए जाने पर एक तिहाई अंक काट लिया जाएगा। हालांकि इसमें समस्या समाधान के प्रश्नों के लिए कोई निगेटिव मार्किंग नहीं है। उम्मीदवार प्रश्नों का उत्तर देते समय सावधानी बरतें। कोई जरूरी नहीं कि सारे प्रश्नों को हल ही किया जाए। जो समझ में नहीं आ रहा हो, उस पर अनावश्यक समय खर्च करने की बजाए छोड़ कर आगे बढ़ जाएं। बाद में समय मिलने पर एक बार देख लें। इससे समय की बचत होगी। जिन पर कोई अंक नहीं काटे जाएंगे, ऐसे प्रश्नों को ज्यादा से ज्यादा हल करें।
परीक्षा के एक दिन पूर्व तनावरहित रहें
परीक्षा के एक दिन पूर्व पढ़ाई का अनावश्यक दबाव न लें, क्योंकि तनावग्रस्त मस्तिष्क की कार्य क्षमता कम हो जाती है और परीक्षा के प्रदर्शन स्तर में भी कमी आ जाती है। अत: स्वयं को शांत एवं तनावमुक्त रखने का प्रयास करें। एक दिन पूर्व रात में हल्का सुपाच्य भोजन लें, जिससे वह ठीक से पच सके और परीक्षा के दिन आप खुद को बेहतर महसूस कर सकें। इसके अलावा परीक्षा की पूर्व रात्रि में दिमाग को शांत रख कर पर्याप्त नींद लें। इससे अगले दिन मस्तिष्क तरोताजा रहता है तथा अधिक सक्रिय रह कर स्मृति प्रभावी रूप से साथ देती है।
आसान सवालों को पहले हल करें
परीक्षा भवन में प्रश्नपत्र मिलने पर ऊपर दिए निर्देशों को पहले ध्यानपूर्वक पढम् लें। प्रत्येक प्रश्न के जितने भी विकल्प दिए गए हैं, सबको सावधानीपूर्वक पढ़ें, ताकि गलतियां कम हों। प्रश्नपत्र हल करते समय सरल व आसान प्रश्नों का जवाब पहले दें। उसके बाद ही कठिन प्रश्नों की ओर बढ़ें। गलत पता लगा चुके विकल्पों को पहले ही काट दें, ताकि बचे हुए विकल्पों पर ध्यान देकर सही विकल्प का पता आसानी से लगा सकें। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर देने के लिए एक निश्चित समय होता है, जिसमें उम्मीदवार प्रश्न पढ़ कर उत्तर दे सके। सभी प्रश्न हल करने की तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण है कि जो भी प्रश्न हल करें, उनके उत्तर ठीक हों।
ओएमआर शीट ध्यानपूर्वक भरें
इस परीक्षा में दिए गए उत्तरों का मूल्यांकन ओएमआर शीट के जरिए ही किया जाता है। इसलिए उम्मीदवार ओएमआर शीट भरते समय पूरी सावधानी बरतें। उन्हें सलाह दी जाती है कि वे ओएमआर शीट गंदी न करें, गोलों को आकृति के अंदर रंगने, ओएमआर शीट न मोडऩे और ज्यादा काटपीट से बचने की सलाह दी जाती है। एक बार गोला काला हो जाने के बाद वही मान्य होता है। शीट भरते समय इस बात का ध्यान रहे कि गलत प्रश्न संख्या के सामने दूसरे प्रश्न का उत्तर न भर दिया जाए, क्योंकि कुछ प्रश्नों को छोड़ देने पर क्रम संख्या गलत होने की संभावना ज्यादा होती है।
स्कोर कार्ड से करें आकलन
प्रैक्टिस सेट हल करने के दौरान उम्मीदवार को पूरी तरह से गम्भीर बनना होगा, क्योंकि परीक्षा के प्रति आपकी तैयारी का स्तर यहीं से पता चलता है। इस परीक्षा में उम्मीदवारों को कुछ ही अवसर मिलते हैं, इसलिए वे पहले स्कोर कार्ड के परिणाम से यह तय कर लें कि उसके मुताबिक आप किस स्तर तक पहुंचे हैं। यदि आपको लगता है कि आपकी तैयारी परीक्षा में सफल होने लायक नहीं है तो आप उसे छोड़ भी सकते हैं। इससे आपका अटेम्प्ट बचा रहेगा। स्कोर कार्ड का आकलन इस रूप में किया जा सकता है-
टिप्स, जो आएंगे काम

  1. हर पहलू की जानकारी आवश्यक
  2. ज्यादा से ज्यादा तार्किक क्षमता विकसित करें
  3. ग्रुप बना कर अध्ययन करना विशेष लाभप्रद
  4. अपने अंदर सकारात्मक भाव विकसित करें
  5. समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें

Sunday, May 12, 2013

गुणों की खान है खीरा


खीरे में प्रचुर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेट होते है जो हमारे शरीर के इम्यून फंक्शन को बरकरार रखने मदद करते है। इसे रोजाना खाने से गर्मी से लू नहीं लगती। इसमें पानी की मात्रा भी अधिक होती है, जो शरीर में पानी की कमी नहीं होने देती। इसके सेवन से थकावट नहीं होती है। यहां आपको डाइटीशियन इति भल्ला बता रही है इसके अन्य गुणों के बारे में।
 1. इसका प्रयोग गर्मी से राहत देने और जलन को दूर करने के लिए घरेलू उपचार के रूप में किया जाता रहा है। यह सिर्फ डाइट में ही नहीं प्रयोग किया जाता है, स्त्रियां इसका खास उपयोग आंखों की थकावट को दूर करने के लिए भी करती है।
 2. इसे अच्छी तरह से साफकरके छिलके समेत खाएं तो अच्छा रहता है। खीरे में फाइबर बहुत होता है।
 3. अगर आपको इसे साबुत खाने में समस्या है तो जूस पिएं।
 4. डायबिटीज, एसिडिटी, ब्लड प्रेशर से पीडि़त व्यक्ति या जो वजन को नियंत्रित करना चाहते है, उन्हे सुबह खाली पेट खीरे का जूस लेना चाहिए। स्वाद बढ़ाने के लिए उसमें थोड़ा नीबू का रस डाल सकती है। चाहे तो जूस का बर्फ जमा लें। ब्लड प्रेशर की समस्या हो तो जूस में नमक न डालें।
 5. यह आंखों की सूजन कम करता है और उन्हे राहत के साथ ठंडक भरा एहसास देता है।
 6. खीरा एक बेहतरीन क्लींजर और टोनर होता है।
 7. खीरे में मिनरल की मात्रा अधिक होती है। इसके अलावा इसमें पोटैशियम, सोडियम, मैग्नीशियम, सल्फर, सिलिकॉन, क्लोरीन









संतरे की रसीली बातें


विटामिन सी से भरपूर संतरा पोषकीय तत्वों और रोग निवारक क्षमताओं से युक्त एक अत्यंत उपयोगी फल है नींबू परिवार का..
 - एक सामान्य आकार के संतरे में पाए जाने वाले तत्वों का विवरण इस प्रकार है। प्रोटीन-0.25 ग्राम, कार्बोज 2.69 ग्राम, वसा 0.03 ग्राम, कैल्शियम 0.045 प्रतिशत, फास्फोरस 0.021 प्रतिशत, लोहा 5.2 प्रतिशत, तांबा 0.8 प्रतिशत।
 - संतरे की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि इसका रस शरीर के अंदर पहुंचते ही रक्त में रोग निवारणीय कार्य प्रारंभ हो जाता है। इसमें पाए जाने वाले ग्लूकोज एवं डेक्सट्रोज जैसे जीवनशक्ति प्रदान करने वाले तत्व पचकर शक्तिवर्धन का कार्य करने लगते हैं। इसका रस अत्यंत दुर्बल व्यक्ति को भी दिया जा सकता है।
 - संतरे में पाये जाने वाले उपयोगी तत्वों के कारण यह अनेक शारीरिक रोगों से मुक्ति दिलाता है।
 - मितली और उल्टी में संतरे के रस में थोड़ी सी काली मिर्च और काला नमक मिलाकर लिया जाना लाभकारी रहता है।
 - रक्तस्राव, मानसिक तनाव, दिल और दिमाग की गर्मी में इसकी विशेष उपयोगिता है।
 - कब्जियत होने पर संतरे के रस का शर्बत और शिकंजी के साथ काला नमक, काली मिर्च और भुना जीरा मिलाकर लेना लाभकारी रहता है।
 - संतरे में लहसुन, धनिया, अदरख मिलाकर चटनी खाने से पेट के रोगों में लाभ मिलता है।
 - बुखार के रोगी को और पाचन विकार में संतरे के रस को हल्का गर्म करके उसमें काला नमक और सोंठ का चूर्ण मिलाकर प्रयोग करना लाभकारी रहता है।
 - संतरे और मुनक्के का मिश्रण लेने से आंव और पेट के मरोड़ से मुक्ति मिल जाती है।
 - सर्दी-जुकाम या इनफ्लुएंजा में एक सप्ताह एक गुनगुना संतरे का रस काली मिर्च और पीपली का चूर्ण मिलाकर लेना लाभकारी रहता है।
 - मुंहासे होने पर संतरे के रस का सेवन तथा उसके छिलके में हल्दी मिलाकर लेप लगाना लाभकारी रहता है।
 - चेहरे के सौंदर्य को निखारने के लिए हल्दी, चंदन, बेसन और संतरे के छिलके का चूर्ण दूध या मलाई में मिलाकर लगाएं।






नहीं चलेगी एलर्जी की मर्जी


एलर्जी तब होती है, जब शरीर किसी पदार्थ के प्रति प्रतिक्रिया करता है। वह पदार्थ जिसके कारण प्रतिक्रिया होती है, उसे एलर्जन कहा जाता है। एलर्जी के विभिन्न प्रकार होते हैं। सामान्य रूप से एलर्जी इन कारणों से उत्पन्न होती है-
 - हवा में मौजूद धुआ, गर्दा और फूलों के पराग कण आदि।
 - कुछ लोगों में दूध, रसायनों या फिर कुछ दवाओं के सेवन से।
 - कीड़ों के डंक जैसे बर्र, मधुमक्खी या चीटे के काटने आदि से।
 लक्षण 
 - नाक में खुजली, नाक का बहना या बद होना।
 - गले में खुजली होना या खासी आना।
 - छींकना, खासना और कभी-कभी अस्थमा या दमा का दौरा पडऩा।
 - आखों में खुजली, लाली, सूजन, जलन या पानी सरीखा द्रव बहना।
 - त्वचा पर लाली पडऩा और खुजली होना।
 - कान में तकलीफ होने पर सुनने की क्षमता में कमी आना।
 - सिरदर्द, मितली या उल्टी, पेट में दर्द या मरोड़ होना। दस्त होना।
 - मुंह के आसपास सूजन या निगलने में कठिनाई।
 एलर्जी के प्रकार 
 एलर्जिक कन्जंक्टिवाइटिस: यह आमतौर पर पाया जाने वाला एलर्जी का एक प्रकार है। यह समस्या धूल, धुएं, कॉन्टैक्ट लेंस व सौंदर्य प्रसाधन से सबधित वस्तुओं के इस्तेमाल से उत्पन्न हो सकती है। इसमें आमतौर पर आखों में लाली, जलन व खुजली महसूस होती है।
 त्वचा की एलजीर्: त्वचा की एलर्जी सबसे आम समस्याओं में से एक है। इसमें एग्जिमा व अरटीकेरिया नामक रोग प्रमुख हैं। एग्जिमा आमतौर पर बचपन में होता है किन्तु वयस्क अवस्था तक जारी रह सकता है। त्वचा पर लाल चकत्ते उभर आते हैं। एलर्जी का यह प्रकार अक्सर अज्ञात कारणों से उत्पन्न होता है।
 फूड एलजीर्: किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी की शिकायत होना फूड एलर्जी का सूचक है। एलर्जी से सबधित शिकायतों का निदान व उसका उपचार आवश्यक है।
 डायग्नोसिस 
 त्वचा परीक्षण: एलर्जी उत्पन्न करने वाले तत्वों की पहचान के लिए यह परीक्षण किया जाता है।
 रक्त परीक्षण: यह रक्त में विशिष्ट एंटीबॉडीज- की पहचान के लिए किया जाता है।
 उपचार 
 - डॉक्टर की सलाह से कई एलर्जी रोधक दवाओं का प्रयोग किया जा सकता है। जैसे मोन्टेल्यूकास्ट तत्व से युक्त दवा आदि।
 - इम्यूनोथेरेपी के माध्यम से व्यक्ति में धीरे-धीरे किंतु अधिक मात्रा में एलर्जन पहुंचाया जाता है।




गर्भाशय की सुरक्षित सर्जरी


ऑपरेशन के रूप में हिस्टेरेक्टॅमी का इलाज दो सर्जिकल विधियों (लैप्रोस्कोपिक सर्जरी और ओपन सर्जरी) द्वारा किया जा रहा है। इसे विडंबना ही कहेंगे कि उलर भारत में हिस्टेरेक्टॅमी से सबधित लगभग 80 फीसदी से अधिक मामले ओपन सर्जरी के जरिये ही किए जा रहे हैं। जबकि ओपन सर्जरी की तुलना में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिये हिस्टेरेक्टॅमी का ऑपरेशन काफी सुरक्षित, कारगर व सुविधाजनक है।
 क्या हैं कारण 
 हिस्टेरेक्टॅमी का ऑपरेशन इन स्थितियों में किया जाता है..
 -माहवारी के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, जो दवाओं से ठीक नहीं हो रहा हो।
 -40 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में फाइब्रॉयड का होना।
 -एंडोमैट्रियोसिस और एडेनोमायोसिस नामक रोग होना।
 -गर्भाशय व अंडाशय के सर्विक्स या ट्यूब का कैंसर।
 -गर्भाशय के किसी भाग में कैंसर पूर्व अवस्था।
 अतीत में हिस्टेरेक्टॅमी पेट पर एक बड़ा चीरा लगाने के बाद ही की जाती थी, लेकिन अब गर्भाशय को निकालने की इस विधि को अधिकतर स्त्री रोग विशेषज्ञ पुराना मानते हैं। दुनिया के अधिकतर देशों में 30 प्रतिशत सर्जरी ओपन तकनीक से की जाती है, जिसके कारण सर्जरी के बाद पीडि़त महिला को स्वस्थ होने में काफी समय लग जाता है।
 तुलना दोनों सर्जरी की 
 लैप्रोस्कोपिक सर्जरी, ओपन सर्जरी की तुलना में कई गुना बेहतर है। ऐसा इसलिए, क्योंकि सर्जन या स्त्री रोग विशेषज्ञ किसी दृश्य को 20 गुना बड़ा और अच्छी तरह से देख सकते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में विशेष उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है ताकि सर्जन ओपन सर्जरी की तुलना में कहींअधिक अच्छे ढंग से बेहतर गुणवत्त के साथ सर्जरी कर सके।
 भ्रातिया और तथ्य 
 लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॅमी से कुछ मिथक जुड़े हैं, जिनका तथ्यों की रोशनी में निवारण करना जरूरी है
 भ्राति: लेप्रोस्कोपी से बड़े आकार के गर्भाशय की सर्जरी नहीं की जा सकती।
 तथ्य: इस तरह की धारणा गलत है। सच तो यह है कि लैप्रोस्कोपी से किसी भी आकार के गर्भाशय की सर्जरी की जा सकती है।
 भ्राति: जो महिलाएं पहले ही सर्जरी करा चुकी हैं या जिनके बच्चे ऑपरेशन से हुए हैं, उनकी लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॅमी सभव नहीं है।
 तथ्य: जो महिलाएं पहले भी सीजेरियन या अन्य किसी स्वास्थ्य समस्या के कारण ओपन सर्जरी करा चुकी हैं, वे भी लैप्रोस्कोपी के द्वारा सर्जरी करा सकती हैं। इन दिनों स्तरीय लैप्रोस्कोपिक केन्द्रों पर कैसर सर्जरी (जैसे -सर्विक्स, गर्भाशय, आदि) भी लेप्रोस्कोपी के जरिये आसानी से की जा सकती है।
 भ्राति: लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॅमी अधिक महंगी है।
 तथ्य: यह मिथक पूरी तरह से गलत है क्योंकि लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॅमी, ओपन सर्जरी की तुलना में न सिर्फ तुलनात्मक रूप से सस्ती है बल्कि पीडि़त महिला जल्द ही अपने काम पर जा सकती है और इस तरह उसे अपनी कमाई करने में मदद मिल सकती है।
 भ्राति: लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॅमी के बाद आखें और हड्डिया कमजोर हो जाती हैं और हार्मोन्स में असतुलन पैदा हो जाता है।
 तथ्य: इन दिनों हिस्टेरेक्टॅमी के द्वारा अंडाशय (ओवरी)को आम तौर पर नहीं निकाला जाता (जब तक कि पीडि़त महिला कैंसर से ग्रस्त न हो)। अंडाशय से उत्सर्जित होने वाले हार्मोन्स में सामान्य तौर पर कोई गड़बड़ी नहीं होती है और न ही हिस्टेरेक्टॅमी के बाद आखें और हड्डिया कमजोर होती हैं।
 लैप्रोस्कोपिक सर्जरी और ओपन सर्जरी में अंतर 
 1. अस्पताल में सिर्फ एक दिन रहना पड़ता है।
 2. रक्त का बहुत कम नुकसान होता है (100 मिली से भी कम)। अधिकतर मामलों में रक्त चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ती।
 3. आई. वी. ड्रिप की जरूरत नहीं होती है।
 4. बहुत कम दर्द होता है (अधिकतर पीडि़त महिलाओं को दर्दनिवारक गोलिया लेने की भी जरूरत नहीं पड़ती)।
 5. ऑपरेशन कराने के बाद महिला दो-तीन दिनों में ही काम पर वापस लौट सकती है।
 6. कम महंगी है।
 1. अस्पताल में पाच से छह दिनों तक रहना पड़ता है।
 2. रोगी में करीब 500 मिली रक्त का नुकसान होता है। ओपन सर्जरी में कई बार रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है।
 3. आई. वी. ड्रिप की जरूरत 24 घटे तक होती है।
 4. अधिक दर्द होता है (सर्जरी के बाद 3-4 दिनों तक दर्द रहता है)।
 5. आम तौर पर एक महीने के बाद काम पर लौट सकती हैं। कुछ महिलाओं को इससे ज्यादा वक्त लग सकता है।
 6. अधिक महंगी है।