Thursday, July 11, 2013

रोचक इंटरव्यू: हर सवाल का जवाब M.P

अफसर -: आपका नाम क्या है..?
मोहन -: एम.पी.,
अफसर -: ठीक से पूरा बताओ
मोहन -: मोहन पाल,
अफसर -: आपके पिता का नाम?
मोहन : एम.पी.,
अफसर -: इसका क्या मतलब है?
मोहन -: मनमोहन पाल
अफसर -: आप कहां रहते हैं?
मोहन : एम.पी., सर।
अफसर -: अच्छा, मध्य प्रदेश?
मोहन -: नहीं सर, महाराजपुर
अफसर -: ओह,हो! तुम्हारी क्वालिफ़िकेशन क्या है?
मोहन -: एम.पी., सर।
अफसर -: अब यह क्या है?
मोहन -: मैट्रिक पास, सर।
अफसर -: तुम्हे यह नौकरी क्यूं चाहिए?
मोहन -: एम.पी., सर।
अफसर -: (गुस्से से) अब इसका क्या मतलब है?
मोहन -: मनी प्रॉब्लम , सर।
अफसर -: अपनी विशेषता बताओ।
मोहन -: एम.पी., सर।
अफसर -: अरे, साफ-साफ बताओ।
मोहन -: मल्टिपरपज परस्नैलिटी।
अफसर -: इंटरव्यू यहीं खत्म होता है, आप जा सकते हैं।
मोहन -: एम.पी., सर।...??
अफसर -: अब इसका क्या मतलब है...?
मोहन -: मेरा परफ़ारमेंस...?
अफसर -: (बाल नोचते हुए) एम.पी. !!!
मोहन -: यानि..?
अफसर -: MENTALLY PUNCTURE

Thursday, June 27, 2013

स्मरण शक्ति और बुद्धि बढ़ाने वाली ब्राह्मी


ब्राह्मी को यह नाम उसके बुद्धिवर्धक होने के गुण के कारण दिया गया है। इसे जलनिम्ब भी कहते हैं क्योंकि यह प्रधानतः जलासन्न भूमि में पाई जाती है। मुख्यतः यह हिमालय की तराई, बिहार तथा उत्तर प्रदेश आदि में नदी नालों के किनारे पाई जाती है। गंगा नदी के किनारे भी यह लगभग पूरे वर्ष ही पाई जाती है।
इसका पौधा फैलने वाला होता है। इसकी पत्तियां चिकनी तथा नरम होती हैं जिनकी लंबाई ज्यादा से ज्यादा एक इंच तथा चौड़ाई सामान्यतः 10 मिलीमीटर होती है। इसमें गर्मियों में नीले सफेद या हल्के गुलाबी रंग के फूल आते हैं जिनमें से छोटे−छोटे बीज निकलते हैं। इसका काण्ड लगभग 2−3 फुट ऊंचा होता है परन्तु यह छोटा और झुका हुआ दिखाई देता है क्योंकि काण्ड की ग्रंथियों से जड़ें निकलकर जमीन पकड़ लेती हैं।
ब्राह्मी में एल्केलाइड तथा सेपोनिन नामक दो मुख्य जैव सक्रिय पदार्थ पाए जाते हैं। इसमें पाए जाने वाले दो मुख्य एल्केलाइड हैं ब्राह्मीन तथा हरपेस्टिन जबकि बेकोसाइड ए तथा बी मुख्य सेपोनिन हैं। गुणों की दृष्टि से ब्राह्मी कुचला में पाए जाने वाले एल्केलाइड स्ट्रीककनीन के समान हैं परन्तु यह उसकी तरह विषाक्त नहीं होती। इनके अतिरिक्त ब्राह्मी में बोटूलिक अम्ल, डी0 मेनिटॉल, स्टिग्मा स्टेनॉल, बीटा−साइटोस्टीरॉल तथा टेनिन आदि भी पाए जाते हैं। हरे पत्तों में प्रायः एल्केलाइड तथा उड़नशील तेल पाए जाते हैं जबकि सूखे पौधों में सेण्टोइक एसिड तथा सेण्टेलिंक एसिड भी पाए जाते हैं।
ब्राह्मी के पौधे के सभी भाग उपयोगी होते हैं। प्रायः इसका ताजा या सुखाया गया पचांग प्रयोग किया जाता है। जहां तक हो सके ब्राह्मी को ताजा ही प्रयोग करना चाहिए। परन्तु जहां यह उत्पन्न नहीं होती वहां इसका छाया में सुखाया गया पचांग ही प्रयोग में लाया जाता है। यदि इसे उबाला जाए या धूप में सुखाया जाए तो इसका उड़नशील तेल नष्ट हो जाता है और इसके गुण नष्ट हो जाते हैं इस कारण इसका क्वाथ भी प्रयोग में लाया जाता है। सुखा कर रखे गए पचांग के चूर्ण को एक वर्ष तक प्रयोग किया जा सकता है।
ब्राह्मी का प्रभाव मुख्यतः मस्तिष्क पर पड़ता है। यह मस्तिष्क के लिए एक पौष्टिक टॉनिक तो है ही साथ ही यह मस्तिष्क को शान्ति भी देती है। लगातार मानसिक कार्य करने से थकान के कारण जब व्यक्ति की कार्यक्षमता घट जाती है तो ब्राह्मी का आश्चर्यजनक असर होता है। ब्राह्मी स्नायुकोषों का पोषण कर उन्हें उत्तेजित कर देती है और हम पुनः स्फूर्ति का अनुभव करने लगते हैं।
मिरगी तथा उन्माद में भी यह बहुत लाभकारी होती है। मिरगी के दौरों में यह विद्युत स्फुरण के लिए उत्तरदायी केन्द्र को शांत करते हैं इससे स्नायुकोषों की उत्तेजना कम होती है तथा दौरे धीरे−धीरे घटते हुए लगभग बिल्कुल बंद हो जाते हैं। उन्माद में भी यह इसी प्रकार काम करती है।
उदासी, निराशाभाव तथा अधिक बोलने से होने वाले स्वर भंग में भी ब्राह्मी बड़ी गुणकारी होती है। यदि कोई बच्चा जन्म से ही तुतलाता हो तो उसका उपचार भी ब्राह्मी द्वारा सफलतापूर्वक किया जा सकता है। अनिद्रा के उपचार के लिए ब्राह्मी चूर्ण की तीन ग्राम मात्रा को गाय के दूध के साथ रोगी को दिया जाता है। यदि ताजा पत्ते उपलब्ध हों तो इसके 20−25 पत्तों को अच्छी तरह साफ करके आधा किलो गाय के दूध में घोंट छानकर लगभग सात दिनों तक दिया जाता है। इससे वर्षों पुराना अनिद्रा का रोग भी दूर हो जाता है।
मिरगी के दौरों में ब्राह्मी का रस आधा चम्मच शहद के साथ दिया जाता है यदि रस उपलब्ध नहीं हो तो चूर्ण का शहद के साथ प्रयोग किया जा सकता है। शुरू में चूर्ण केवल ढाई ग्राम ही देना चाहिए परन्तु यदि फायदा न हो तो 5 ग्राम तक दिया जा सकता है।
स्मृति दौर्बल्य तथा अल्पमंदता में ब्राह्मी का रस या चूर्ण पानी या मिसरी के साथ रोगी को दिया जाना चाहिए। ब्राह्मी के तेल की मालिश से मस्तिष्क की दुर्बलता तथा खुश्की दूर होती है तथा बुद्धि बढ़ती है। तेल बनाने के लिए 1 लीटर नारियल तेल में लगभग 15 तोला ब्राह्मी का रस उबाल लें। यह तेल सिरदर्द, चक्कर, भारीपन, चिंता आदि से भी राहत दिलाता है।

हिस्टीरिया जैसे रोगों में यह तुरन्त प्रभावी होती है जिससे सभी लक्षण तुरन्त नष्ट हो जाते हैं। चिन्ता तथा तनाव में ठंडाई के रूप में भी इसका प्रयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त किसी ज्वर या अन्य बीमारी के कारण आई निर्बलता के निवारण के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। कुष्ठ तथा अन्य चर्म रोगों में भी यह उपयोगी है। बच्चों को खांसी या छोटी उम्र में क्षयरोग होने पर छाती पर इसका गर्म लेप करना चाहिए। खांसी तथा गला बैठने पर इसके रस का सेवन काली मिर्च तथा शहद के साथ करना चाहिए। अग्निमंदता रक्त विकार तथा सामान्य शोध में भी यह तुरन्त फायदा पहुंचाती है।

Sunday, May 19, 2013

मेरी मेडिकल चॉइस: ऐंजलीना जोली



करीब दस साल पहले मेरी मां की मौत ब्रेस्ट कैंसर से हुई थी। उस समय वह 59 साल की थीं। मां बच्चों को बहुत प्यार करती थीं। हमारे परिवार के कई बच्चों को उनसे मिलने का सौभाग्य मिल चुका है लेकिन कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जिन्होंने अपनी नानी को नहीं देखा। मैं बच्चों को उनकी नानी के बारे में बताती हूं। उन्हें उस बीमारी के बारे में भी बताती हूं जिसने नानी को हमसे छीन लिया। बच्चे उदास होकर मुझसे पूछते हैं, क्या मैं भी उन्हें उसी तरह छोड़कर चली जाऊंगी जैसे नानी चली गई।
उनका मन रखने के लिए मैं कहती हूं कि चिंता करने की कोई जरूरत नहीं। लेकिन मुझे पता है कि मेरे अंदर वह खराब जीन बीआरसीए 1 मौजूद है जिसकी वजह से मुझे कभी भी ब्रेस्ट कैंसर और ओवरियन कैंसर हो सकता है। डॉक्टरों का कहना था कि इनके होने का खतरा मेरे लिए क्रमश: 87 और 50 परसेंट है। हर औरत के मामले में यह रिस्क अलग-अलग होता है, क्योंकि ज्यादातर मामलों में ब्रेस्ट कैंसर की वजह वंशानुगत नहीं होती।
जरूरी नहीं कि परिवार में किसी को यह बीमारी हो तभी दूसरों को इसका रिस्क हो। यह भी संभव है है कि जीन में गड़बड़ी होने के बावजूद किसी महिला को यह बीमारी न हो। जीन में गड़बड़ी वाली सौ में 65 महिलाओं को ही कैंसर होने का खतरा होता है। जब मुझे इस सच्चाई का पता चला तो मेरे पास एक ही रास्ता था। बचाव के कदम के रूप में मैंने अपने दोनों स्तन निकलवा देने का फैसला किया, क्योंकि मुझे ब्रेस्ट कैंसर का खतरा ज्यादा है। 27 अप्रैल को मेरी करीब तीन महीने लंबी मास्टेक्टॉमी पूरी हुई।
अब तक मैंने कहीं इसका जिक्र नहीं किया, लेकिन अब मैं इस विषय में सबको बताना चाहती हूं ताकि अन्य स्त्रियों को भी इस बीमारी के बारे में पता चले। आज के दौर में भी कैंसर का नाम सुनते ही लोग घबरा जाते हैं। हताश हो जाते हैं और उम्मीद छोड़ देते हैं। लेकिन आज कैंसर से लडऩा उतना मुश्किल नहीं है। एक ब्लड टेस्ट से पता चल जाता है कि किसी महिला को ब्रेस्ट और ओवरियन कैंसर का खतरा है या नहीं। सही समय पर बीमारी के बारे में पता चल जाए तो इलाज संभव है।
मेरा मेडिकल प्रसीजर 2 फरवरी को शुरू हुआ। पहला कदम था निपल डिले। इसमें निपल के पीछे छाती में रक्त प्रवाह बढ़ाकर बीमारी को रोकने की कोशिश की जाती है। इसमें दर्द होता है लेकिन इससे निपल बचने की संभावना बढ़ जाती है। दो हफ्ते बाद मेरी आठ घंटे लंबी एक बड़ी सर्जरी हुई जिसमें ब्रेस्ट के टिशूज को निकालकर उसकी जगह टेंपररी फिलर्स लगाए गए। होश आया तो मेरे शरीर में ट्यूब्स लगे थे। लगा कि किसी साइंस फिक्शन फिल्म की शूटिंग कर रही हूं। लेकिन सर्जरी के कुछ ही दिनों बाद मैं नॉर्मल हो गई। नौ हफ्ते बाद ब्रेस्ट इम्प्लांट के लिए फाइनल सर्जरी हुई। पिछले कुछ सालों में इस सर्जरी की तकनीक बहुत उन्नत हो चुकी है। इसके नतीजे भी बहुत खूबसूरत हैं।
मेरे लिए यह फैसला लेना बहुत मुश्किल था। लेकिन अब मैं खुश हूं कि मुझे ब्रेस्ट कैंसर होने का चांस अब सिर्फ पांच परसेंट है। मैं अपने बच्चों को कह सकती हूं कि उन्हें घबराने की कोई जरूरत नहीं। नानी की तरह उनकी मां उन्हें छोड़कर नहीं जाएगी। मैं पूरी कोशिश करती हूं कि मेरे बच्चे खुश रहें। उन्हें मेरी तकलीफ के बारे में पता न चले। उन्हें मेरे शरीर पर कुछ छोटे निशान दिखते हैं, उससे ज्यादा कुछ नहीं। बाकी सब पहले जैसा है।
उनकी मां पहले की तरह उनसे प्यार करती है, उनके नखरे उठाती है। वे जानते हैं कि उनकी मां उन पर जान छिड़कती है और उनके लिए किसी भी हद तक जा सकती है। व्यक्तिगत तौर पर मैं खुद को पहले से ज्यादा ताकतवर महसूस कर रही हूं। बेशक, इस फैसले ने मेरे स्त्रीत्व को खंडित नहीं किया, बल्कि उसे मजबूत बनाया क्योंकि स्त्रीत्व देह का नहीं, व्यक्तित्व का गुण है।
मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे ब्रैड पिट जैसा जीवनसंगी मिला। किसी पति या पार्टनर के लिए भी यह एक अभूतपूर्व अनुभव है क्योंकि वह इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा होता है। सर्जरी के दौरान ब्रैड पिंक लोटस ब्रेस्ट सेंटर में मौजूद थे। जब मैं अस्पताल में थी तो वह हर पल यह कोशिश करते थे कि मेरे चेहरे पर मुस्कुराहट हो। इस बीच हम एक दूसरे के करीब आए और हमारा प्यार और बढ़ा। मैं हर औरत को बताना चाहती हूं कि उसे निराश होने की जरूरत नहीं क्योंकि उसके पास विकल्प मौजूद है। जिन महिलाओं के परिवार में किसी को ब्रेस्ट या ओवरियन कैंसर हो चुका है, उन्हें भी परेशान होने के बजाय डॉक्टरों से संपर्क करना चाहिए। इस तरह वे तय कर सकेंगी कि उन्हें किस तरह के इलाज की जरूरत है। कई डॉक्टर हैं सर्जरी की बजाय दूसरी तकनीकों का भी इस्तेमाल करते हैं।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के आंकड़े बताते हैं कि ब्रेस्ट कैंसर से हर साल साढ़े चार लाख मरीजों की मौत होती है। खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग वाले देशों में न तो उन्हें जांच की सुविधा मिलती है, न ही सही समय पर उनका इलाज किया जाता है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि हर पृष्ठभूमि और आर्थिक स्थिति वाली महिला को जीन टेस्टिंग का मौका मिले और समय पर उसका उपचार हो। अमेरिका में बीआरसीए 1 और बीआरसीए 2 की जांच बहुत महंगी -तीन हजार डॉलर से ज्यादा है, इसलिए यहां भी बहुत सी महिलाएं अपनी जांच नहीं करा पातीं।
मैंने अपने अनुभव को सार्वजनिक करने का फैसला किया, क्योंकि मैं चाहती हूं कि अन्य औरतों को भी इस बारे में पता चले। वे कैंसर के खतरों के बारे में जानें, साथ ही यह भी जानें कि इसका इलाज संभव है। उम्मीद है, वे अपनी जांच कराएंगी और कैंसर का खतरा होने पर विकल्पों की तलाश करेंगी। जीवन चुनौतियों से भरा है, लेकिन जिन चुनौतियों का मुकाबला करने की ताकत हममें है, उनसे हमें बिल्कुल घबराना नहीं चाहिए।

17 दिन मलबे में दबे रहने के बाद जिंदा निकली