Thursday, April 18, 2013
ओमेगा-3 से पाएं लंबी उम्र
एक नए शोध के मुताबिक ऐसे व्यक्ति जिनके खून में ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा औसतन ज्यादा होती है, वे इस फैटी एसिड के सबसे कम मात्रा वाले लोगों की तुलना में दो साल ज्यादा जीते हैं। अमेरिका के 2700 बुजुर्गों पर हुए इस अध्ययन में पाया गया कि ट्य़ूना जैसी तैलीय मछली का सप्ताह में दो बार सेवन करने वाले लोगों की औसत उम्र दो साल बढ़ जाती है। शोध से यह भी संकेत मिले कि लोगों को डाइट में मछली ज्यादा मात्रा में शामिल करनी चाहिए।
स्वाद क्यों बने मौसम का मोहताज
मौसम भिंडी का हो और आपका मन हो गाजर या गोभी खाने का, तो आप क्या करेंगी? बेमौसमी सब्जी बाजार से महंगे दामों पर खरीद कर लाएंगी या मन मसोस कर रह जाएंगी। बेमौसमी सब्जी का लुत्फ भी आप उठा सकती हैं।
सर्दी का मौसम लगभग खत्म हो चुका है और साथ ही हरी-भरी सब्जियां भी बाजार से विदा ले रही हैं। अगर आप आनेवाले कुछ माह तक इन सब्जियों का स्वाद चखना चाहती हैं तो आपके पास एक उपाय है। आप इन सब्जियों को संरक्षित कर सकती हैं। न तो झुलसाने वाली तेज धूप है और न ही तेज ठंडक। इसी मौसम में घरों में सालभर के लिए आलू के चिप्स, पापड़, बड़ी, मुंगौड़ी आदि बना कर रखे जाते हैं। आइये जानें कि सब्जियां
कैसे संरक्षित करें:
फूलगोभी, गाजर व शलजम ऐसे सुखाएं
गाजर, फूलगोभी, शलजम आदि सब्जियों को सुखाने के लिए पहले उन्हें अच्छी तरह धो लें। गाजर को छील कर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट कर बीच का पीला भाग निकाल दें। इसी तरह फूलगोभी के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें। शलजम को भी छीलकर छोटे-छोटे टुकड़े में काट लें। सब्जियों को गुनगुने पानी में नमक और चुटकी भर खाने वाला सोडा डाल कर एक घंटा भिगोएं। फिर पानी से निकाल कर एक तौलिये पर रखें। जब सब्जियों का पानी सूख जाए तो एक बड़े धागे में सूई की सहायता से माला की तरह पिरो लें। पुराने मलमल के दुपट्टों से थैलियां बनायी जा सकती हैं। इनमें गाजर, मूली, शलजम की माला लटका दें और तेज धूप में सुखाएं। इस तरह से सुखाने में थोड़ा समय ज्यादा लगेगा पर सब्जियां समय तक टिकेंगी। अगर इन्हें हल्की छांव में सुखाया जाएगा तो फफूंद लगने की आशंका बनी रहेगी।
हरी सब्जियों को ऐसे सुखाएं
हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे मेथी, पालक, पुदीना, करीपत्ता, धनिया आदि को सुखाने के लिए डंठल से अलग कर पत्तों को साफ पानी से खूब धोएं। फिर एक बड़े फैले बर्तन में पानी भरें और आधा किलो सब्जी की मात्रा पर एक चम्मच नमक व चुटकी भर खाने वाला सोडा मिला दें। इसमें सब्जियों को पन्द्रह मिनट भिगोएं। पानी से निकालकर रोयेंदार तौलिया पर डालें और हल्के हाथों से थपथपायें ताकि पानी थोडम सूख जाए। फिर मलमल के कपड़े पर हल्की धूप में सुखाएं। जब सब्जी अच्छी तरह सूख जाये तो किसी एयरटाइट डिब्बे में या छोटी-छोटी पॅलीथीन में बंद करके रख दें।
लहसुन और प्याज ऐसे सुखाएं
लहसुन की कलियों को छीलकर तेज धूप में सुखाएं, फिर पाउडर बना कर रख लें। जब भी प्रयोग करना हो तो जरूरत के मुताबिक प्रयोग में लाएं। प्याज को छीलकर पांच प्रतिशत नमक वाले घोल में डालें फिर कपड़े से पोंछ कर तेज धूप में सुखा लें। इसका भी पाउडर बना कर रखा जा सकता है।
हरी मटर के दाने व मक्की के दाने ऐसे करें प्रिजर्व
एक किलो मटर के दानों या मक्की के दानों को आधा लीटर पानी में एक बड़ी चम्मच चीनी और एक चौथाई चम्मच खाने वाला सोडा डाल कर दो मिनट उबालें और तीन मिनट पानी में ही पड़ा रहने दें। एक रोएंदार साफ तौलिया पर डालें और जब पानी सूख जाए तो जिप लॉक वाली छोटी थैलियों में भर कर लॉक करें। हवा निकाल दें और डीप फ्रीजर में रखें। जब जरूरत हो एक थैली निकालें और प्रयोग में लाएं।
बिना केमिकल के संतरे या नीबू का शरबत
एक बोतल में तीन-चौथाई पिसी चीनी भरें और उसमें संतरे या नीबू का ताजा रस निकाल कर डाल दें। रस उतना डालें, जितनी चीनी हो। बिना प्रिजर्वेटिव के अच्छा शरबत तैयार है। इस विधि में पानी का अंश बिल्कुल नहीं होना चाहिए। नहीं तो शरबत खराब हो जाएगा।
टमाटर प्यूरी
मार्च-अप्रैल में टमाटर सबसे सस्ते होते हैं तब इनकी प्यूरी बनाकर रखी जा सकती है। ढाई किलो लाल पके टमाटर लें। इनके ऊपर के फूल हटा कर चार-चार टुकड़े करें। प्रेशरकुकर में डाल कर एक सीटी आने तक पकाएं। ठंडा करके छलनी से पल्प अलग करें। पुन: इसमें पच्चीस ग्राम चीनी और चालीस ग्राम नमक डालकर एक उबाल आने तक पकाएं। आधा चाय का चम्मच सोडियम बेंजोएट मिलाएं और गरम-गरम ही स्टरलाइज्ड बोतलों में भर दें। डिब्बा एयरटाइट होना चाहिए। जब टमाटर महंगे हों इस टमाटर प्यूरी का प्रयोग करें।
Wednesday, April 17, 2013
आपकी स्वच्छता में छुपी है आपकी सुंदरता
मेकअप कर लिया, खूबसूरत कपड़े पहन लिए, पर क्या आप अपनी स्वच्छता पर भी ध्यान देती हैं? सिर्फ सुंदर दिखने से ही बात नहीं बनेगी, आप स्वच्छ रहेंगी तभी स्वस्थ रहेंगी और खूबसूरत भी दिखेंगी।
साफ-सफाई सुंदरता का राज है। यही वजह है कि पर्सनल हाईजीन का ध्यान रखने वाली महिलाएं अपेक्षाकृत ज्यादा स्वस्थ रहती हैं और सुंदर दिखती हैं। दरअसल, पर्सनल हाइजीन स्वस्थ जिंदगी की दिशा में आपका पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है। पर्सनल झइजीन के प्रति सतर्क रहने वाली महिलाओं को जल्दी से न तो कोई इन्फेक्शन होता है और न ही किसी तरह की एलर्जी। और जब शरीर रोग रहित हो तो रूप अपने-आप निखरने लगता है।
अगर आप भी अपने सौंदर्य में निखार लाना चाहती हैं तो पर्सनल हाईजीन के प्रति सचेत रहें। हर दिन नहाना, हाथ-पैर की ठीक से सफाई, नियमित वैक्सिंग, गुप्तांगों की सफाई और सबसे जरूरी हाथों को ठीक से समय-समय पर धोना जैसे कुछ बेहद साधारण-सी आदतों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाकर आप न सिर्फ सेहतमंद रहेंगी, बल्कि खुश भी। शरीर के सभी अंगों की अच्छी तरह साफ-सफाई के साथ ही ऐसी बहुत सी बातें हैं, जिन पर ध्यान देकर तमाम तरह के इन्फेक्शन से बचा जा सकता है।
जब जाएं ब्यूटी पार्लर
अपनी खूबसूरती में निखार लाने के लिए आप ब्यूटी पार्लर तो जाती ही होंगी। ब्यूटी पार्लर जाने में कोई हर्ज नहीं है। पर ब्यूटी पार्लर जाने से पहले वहां की साफ-सफाई का मुआयना जरूर कर लें। कहीं ऐसा न हो कि आपका ब्यूटी पार्लर ही आपके लिए परेशानी का सबब बन जाए। गंदे, सीलनवाले पार्लर में जाने से आपका मन तो खराब होगा ही, साथ ही कई तरह के इन्फेक्शन का खतरा भी बढ़ जाएगा।
ब्यूटी पार्लर में कोई भी सौंदर्य उपचार कराने से पहले उससे जुड़े उपकरणों की साफ-सफाई की जांच अवश्य कर लें।
वैक्सिंग कराने से पहले यह देख लें कि वैक्स साफ-सुथरा और अच्छी क्वालिटी का है या नहीं। वैक्स लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला चाकू साफ है या नहीं। आपसे पहले की गई वैक्सिंग के बाद उसे गर्म पानी में उबाला गया है या नहीं। कुछ महिलाएं मासिक धर्म के दौरान पूरे पैर की वैक्सिंग करवाती हैं। ऐसे में कई बार चाकू पर दाग लग जाता है। अगर उस चाकू को उबाले बिना ही उससे आपकी वैक्सिंग होगी, तो आपको भी वही इन्फेक्शन हो सकता है जो उस महिला को हो। वैक्स के बाद पहले से इस्तेमाल किए गए तौलिए से हाथ-पैर साफ न करवाएं। हमेशा सादी वैक्स कराएं।
आईब्रो बनवाते समय जांच लें कि धागा अच्छी तरह साफ है या नहीं। जिस धागे से आपकी आईब्रो बनाई जाने वाली है, उससे पहले किसी की थ्रेडिंग तो नहीं हुई। इस्तेमाल किए गए धागे को दोबारा इस्तेमाल करने से इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। जैसे आपसे पहले जिसकी थ्रेडिंग की गई है, अगर उसकी आंख के पास कोई इन्फेक्शन रहा होगा तो आपको भी वही इन्फेक्शन हो सकता है।
फेशियल के दौरान ध्यान रखें कि पहले इस्तेमाल किए गए पानी से ही तो आपका फेशियल नहीं किया जा रहा। अगर पानी फेंक भी दिया है तो नया पानी लेने से पहले उस बर्तन को अच्छी तरह साफ किया गया है या नहीं। दरअसल गंदे पानी में तेजी से कीटाणु पनपते हैं। ऐसे में गंदे पानी से फेशियल आपको इन्फेक्शन का शिकार बना सकता है।
पेडीक्योर-मेनीक्योर के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण अच्छी क्वालिटी के न होने पर घाव हो सकते हैं। जैसे नाखूनों की सफाई करने वाली निडिल या अन्य उपकरण अगर ठीक नहीं है तो आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे नाखून भी टेढ़े आ सकते हैं। यही नहीं, खराब क्वालिटी की नेल पॉलिश नाखूनों की खूबसूरती बढ़ाने के बजाय उन्हें नुकसान पहुंचाती है। इसलिए हमेशा अच्छी क्वालिटी की नेल पॉलिश लगाएं। साथ ही सभी उपकरणों को गर्म पानी में उबालने के बाद ही पेडीकोर-मेनीक्योर कराएं। अगर उपकरण स्टरलाइज नहीं किए गए हैं, तो उन्हें इस्तेमाल करने से पहले गर्म पानी में डिटॉल डालकर 10 मिनट तक भिगोएं। इसके बाद साफ कपड़े से अच्छी तरह पोंछ कर उनका इस्तेमाल करें।
कभी भी हेयर कलर और स्ट्रेटनिंग एक साथ न कराएं। एक साथ बहुत सारे ट्रीटमेंट लेने से बालों को नुकसान पहुंचता है। इससे बालों की क्वालिटी खराब होती है। बाल जल्दी झडऩे लगते हैं। इसके अलावा बहुत ज्यादा हेयर कलर के इस्तेमाल से डैंड्रफ हो जाता है, जो देखने में बहुत बुरा लगता है।
मेकअप प्रोडक्ट्स खासकर लिपस्टिक, आई लाइनरआदि किसी के साथ शेयर न करें। इससे अगर सामने वाले व्यक्ति को कोई इन्फेक्शन होगा, तो वह मेकअप प्रोडक्ट्स के जरिए आप तक पहुंच सकता है। मेकअप से पहले हाथ अच्छी तरह जरूर धोएं। कभी भी एक्सपायरी डेट के सौंदर्य प्रसाधन इस्तेमाल न करें। ये त्वचा के लिए खतरनाक हो सकते हैं।
अगर आपको टैटू बनवाने का शौक है तो इसमें कोई हर्ज नहीं है। पर टैटू गुदवाते समय सफाई का पूरा ध्यान रखें। बॉडी पियर्सिग हमेशा अच्छे प्रोफेशनल से फ्रेश सुई से कराएं। पियर्सिग की गई जगह पर नकली आभूषण न पहनें। साथ ही शरीर के जिस हिस्से पर पियर्सिग कराई है, उसे रोज नहाते समय साफ करें। इनके आसपास गंदगी जमा हो जाती है जो नुकसान पहुंचाती है।
इन पर भी ध्यान दें
मासिक धर्म के दौरान दिन में कम से कम तीन बार नैपकिन बदलें। संभव हो तो नैपकिन बदलते समय गुप्तांगों की पानी से अच्छी तरह सफाई करें।
सेक्सुअल इंटरकोर्स के बाद अच्छी तरह गुप्तांगों की सफाई करें।
गुप्तांगों के बालों की साफ-सफाई पर ध्यान दें। बड़े हुए बालों से मासिक धर्म के दौरान संक्रमण का खतरा
रहता है।
गर्मियों में जल्दी-जल्दी बाजू के निचले हिस्से के बाल साफ करें। यहां पसीना जमने से बदबू तो आती ही है, इन्फेक्शन का भी खतरा बढ़ जाता है।
गर्मियों में धूप से आने के बाद अच्छी तरह नहाएं। पसीने से मुक्ति मिलेगी और इन्फेक्शन से भी बची रहेंगी।
जब भी घर से बाहर जाएं तो अपने साथ हैंड सेनिटाइजर रखें। कुछ भी खाने से पहले इससे हाथ साफ करें।
पर्स में रोज धुला हुआ रुमाल रखें। गंदा रुमाल कई तरह के इन्फेक्शन का घर होता है।
किसी दूसरे का तौलिया इस्तेमाल न करें और न ही अपना तौलिया किसी को इस्तेमाल करने दें।
किसी दूसरे की कंघी इस्तेमाल में न लाएं। इससे डैंड्रफ हो सकता है।
रोज जुराबें बदलें। जुराबों में पसीना जम जाता है, जो इन्फेक्शन का कारण बन सकता है।
दिनभर में कम से कम दो बार अच्छी तरह दांतों की सफाई करें। खाना खाने के बाद कुल्ला करना न भूलें।
इसे न करें अनदेखा
पर्सनल हाईजीन में बाथरूम का भी अहम रोल होता है। कई बार हम खुद को तो अच्छी तरह से साफ कर लेते हैं, पर बाथरूम की साफ-सफाई पर बिल्कुल ध्यान नहीं देते। गंदा बाथरूम भी इन्फेक्शन फैलाता है। इससे बचने के लिए बाथरूम में सीलन न रहने दें। नहाने के बाद बाथरूम की खिड़की खोल दें। समय-समय पर बाथरूम की और बाल्टी, मग, टब, नल, शॉवर आदि की अच्छी तरह सफाई करें। सप्ताह में एक बार टब, बाल्टी, मग आदि को धूप दिखाएं। कभी भी गंदे, नमीवाले इनरवियर न पहनें। रोज इनरवियर जरूर बदलें। संभव हो तो दिन में दो बार पैंटी बदलें। इनरवियर धोने के बाद उन्हें धूप में सुखाएं, ताकि उनमें नमी न रहने पाएं। सप्ताह में एक बार डिटॉल वाले पानी में कुछ देर इनरवियर भिगोएं। फिर इन्हें धूप में सुखाएं।
Tuesday, April 16, 2013
बड़े काम की है इंफ्लूएंजा वैक्सीन
बदलते मौसम में आंखों में तकलीफ शुरू हो जाती है। यह आमतौर पर आई फ्लू की वजह से होता है। लेकिन थोड़ी जानकारी की सहायता से आप इससे बच सकते हैं।
आप फ्लू शॉट या इंफ्लूएंजा वैक्सीन लेने की सोच रहे हैं? तो समय आ गया कि आप फ्लू वैक्सीन का टीका लगवा लें। फ्लू होने की शुरुआत अक्सर मौसम परिवर्तन से शुरू होती है। इंफ्लूएंजा वैक्सीन को फ्लू की रोकथाम में कारगर उपाय माना गया है। एक अमेरिकी संस्था सीडीसी (सेंटर्स फॉर डिसिजेज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन) सलाह देता है कि 6 महीने को बच्चा हो या 60 साल का बुजुर्ग, सभी के लिए यह वैक्सीन बहुत आवश्यक है।
फ्लू शॉट क्या है?
फ्लू शॉट एक प्रकार का निष्क्रिय टीका है। इसमें विषाणुओं को खत्म करने के गुण होते हैं। अक्सर इस दवा को सुई की सहायता से बांहों में दिया जाता है। फ्लू शॉट तीन प्रकार के इंफ्लूएंजा वायरस से हमारा बचाव करता है।
वैक्सीन का काम
फ्लू वैक्सीन हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। जब विषाणु किसी ऐसे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करते हैं, जिसने पहले से ही फ्लू शॉट दवा ली हुई है तो रोग प्रतिकारक इन विषाणुओं पर हमला करते हैं और उन्हें मारते हैं। इससे हमारा बचाव होता है।
फ्लू शॉट के प्रकार
फ्लू शॉट तीन प्रकार के होते हैं:
रेगुलर फ्लू शॉट: इसे 6 महीने या उससे अधिक उम्र के बच्चों, स्वस्थ लोगों, गर्भवती महिलाओं के लिए उपयोगी माना गया है।
हाई डोज वैक्सीन: यह 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है।
इंट्राडरमल वैक्सीन: यह 18 से 64 वर्ष की आयु वालों के लिए उपयोगी है।
किसके लिए है जरुरी
चाहे उम्र 6 महीने की हो या 60 साल की, फ्लू शॉट सभी के लिए आवश्यक है।
जिन्हें निमोनिया होने की आशंका अधिक होती है
जो लोग अस्थमा से पीडित हैं
मधुमेह से पीडित व्यक्ति
फेफड़ों में परेशानी से पीडित रोगी
गर्भवती महिलाएं
65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग
यह वैक्सीन न लें अगर
अंडों से एलर्जी है
फ्लू शॉट से एलर्जी है
6 माह से कम उम्र के बच्चे
बुखार से पीडित व्यक्ति को यह वैक्सीन नहीं लेना चाहिए।
फ्लू से बचने के उपाय
फ्लू से बचने के लिए वैसे तो इंफ्लूएंजा वैक्सीन लेना ही बेहतरीन उपाय है, लेकिन कुछ आवश्यक बातों को ध्यान में रखने पर भी आप फ्लू से बचे रह सकते हैं।जब भी आप खांसते या छीकते हैं तो अपनी नाक और मुंह को किसी कपड़े की सहायता से ढक लें
अपने हाथों को साबुन और पानी की सहायता से अच्छी तरह साफ करें
अपने आंख, नाक, मुंह को बार-बार छूने से बचें। इस तरह से कीटाणु फैलते हैं
बीमार लोगों के कपड़ों के संपर्क में आने से बचें
यदि आप फ्लू के कारण बीमार हैं तो करीब 24 घंटे तक घर से बाहर न निकलें
संतुलित भोजन, व्यायाम और सही नींद भी फ्लू की रोकथाम में महत्वपूर्ण भमिका अदा करते हैं
तो कंप्यूटर से आंखें रहेंगी सुरक्षित
लगातार कंप्यूटर पर काम करने से कई बार सिरदर्द की समस्या सामने आती है। इसके साथ और भी मुश्किलें हो सकती हैं।
आप लंबे समय तक कम्प्यूटर पर काम करते हैं और अक्सर सिरदर्द, कमर या फिर गरदन दर्द से परेशान हो जाते हैं? कहीं फेसबुक की 'लतÓ के चलते आपकी आंखों में आंसू और लाली की समस्या तो नहीं रहती? यदि हां, तो सावधान हो जाएं! यह सब एक बड़ी समस्या का एक छोटा हिस्सा भर है! गलत पोस्चर और अत्यधिक कम्प्यूटर इस्तेमाल करने की वजह से होने वाली ये समस्याएं आपके शरीर को इतना नुकसान पहुंचा सकती हैं कि आप इसकी भरपाई भी नहीं कर पाएंगे।
गलत पोस्चर है घातक
देर तक, गलत पोस्चर में काम करने और लगातार की-बोर्ड पर अंगुलियां चलाने से आपकी आंखों पर बहुत तनाव पड़ता है। इससे नर्व और हड्डी से जुड़ी समस्याएं भी होती हैं। शारीरिक गतिविधियों से तरल पदार्थों का प्रवाह बना रहता है और कार्टिलेज स्वस्थ रहते हैं और हड्डियां तंदुरुस्त। गलत पोस्चर में हर दिन 4 घंटे से अधिक बैठने से जोड़े उत्तरोत्तर क्षतिग्रस्त होते हैं - परिणामत: घुटनों, कूल्हों और रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचता है।
देर तक कम्प्यूटर पर काम करने से लिगामेंट में सूजन की समस्या हो सकती है और शरीर के नर्म ऊतक भी क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। लोगों में बार-बार एक ही काम करने की संवेदना अलग-अलग हो सकती है, पर इससे हर किसी में अक्षमता पैदा हो सकती है।
कम्प्यूटर के देर तक इस्तेमाल करने की वजह से एक बड़ी समस्या 'रिपीटिटिव स्ट्रेन इंजरीÓ है। गलत तरीके से बार-बार एक ही काम करने से संबंधित अंग में तनाव पैदा होता है, जैसे अत्यधिक की-बोर्ड के इस्तेमाल से कलाई का दर्द।
सतर्कता है जरूरी
कम्प्यूटर संबंधी बीमारियों की रोकथाम या उससे मुक्ति पाने के लिए सबसे अच्छा उपाय लोगों को कम्प्यूटर के इस्तेमाल के बारे में जागरूक बनाना है। मॉनिटर और की-बोर्ड को सही स्थिति में रखना और अपना पोस्चर सही रखना। यह स्थिति काफी लाभदायक है। इससे मांसपेशी के सूजन की समस्या कम हो सकती है।
डेस्कटॉप है बेहतर
डेस्कटॉप का उपयोग लैपटॉप के मुकाबले कम खतरनाक है। लैपटॉप में स्क्रीन और की-बोर्ड जुड़े होने से शरीर का पोस्चर अपने-आप बिगड़ जाता है, जिससे कमर दर्द रहता है। डेस्कटॉप पर काम करते वक्त कलाई को सीधे रखें और कोहनी को करीब 90 डिग्री पर रखना चाहिए।
गर्दन और कंधे के दर्द से बचे रहेंगे
मॉनिटर, माउस और वह पेपर डाक्युमेंट, जिससे आप कॉपी कर रहे हैं, यदि सही स्थिति में रहें तो गरदन और कंधे के दर्द या अकडऩ में कमी आ सकती है। टाइप करते वक्त कंधे और कान के बीच फोन दबा कर बात करने से भी गरदन और कंधे का दर्द बढ़ता है।
फर्नीचर का डिजाइन अनुरूप होना जरूरी है। कुर्सी का पिछला हिस्सा कंधे की ऊंचाई तक हो। साथ ही, कुर्सी की ऊंचाई बढ़ाने की सुविधा हो। गलत कुर्सी की वजह से भी पोस्चर गलत होता है और आप कुर्सी में धंस कर बैठते हैं, जिससे रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है।
कैसी हो आपकी कुर्सी
आपकी कुर्सी इतनी ऊंची हो कि आप पैर को फर्श पर रखें तो आपके घुटने 90 डिग्री के एंगल पर हों। ध्यान रहे, टाइपिंग के वक्त आपकी बांहें भी 90 डिग्री की एंगल बनाएं। कमर को टिकाते वक्त यह एंगल 20 डिग्री अधिक हो, यानी आपकी कमर कुछ पीछे की ओर 110 डिग्री के एंगल पर हो।
लगातार ज्यादा देर काम न करें
देर तक कम्प्यूटर पर काम करने की आदत हो तो आंखों पर जोर पड़ता है। आंखों में थकान होती है और इससे कई बार धुंधला दिखाई देने की समस्या सामने आती है। इन लक्षणों को इक_े कम्प्यूटर विजन सिण्ड्रोम कहते हैं। इससे बचने के कुछ आसान उपाय हैं।
मॉनिटर पर लगातार न देखें
एकटक स्क्रीन को देखने से आंखों की नमी पर बुरा प्रभाव पडम्ता है। आंखों की नमी बनाए रखने हेतु बार-बार पलक झपकाना जरूरी है। आप हर एक घंटे पर अपनी आंखों को 5-10 मिनट तक मूंद कर रखें, ताकि आंसू की परत फिर से तैयार हो जाए।
मॉनिटर की चमक कम करने से भी विजन सिण्ड्रोम से परेशान लोगों को राहत मिल सकती है। कम्प्यूटर से बिल्कुल सट कर नहीं बैठें। काम करते वक्त तन कर बैठें। कम्प्यूटर के स्क्रीन का बैकग्राउण्ड हल्के रंग का रखें। हर आधे घंटे पर दस सेकेंड हेतु स्क्रीन से नजर हटा लेना भी बहुत लाभदायक है।
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