Monday, April 15, 2013

11 टिप्स ज्यूलरी खरीदने के


गहने स्त्रियों के सच्चे मित्र माने जाते हैं और मनपसंद गहने चुन पाना सच्चा दोस्त मिलने जैसा ही मुश्किल होता है। कोई भी ऐसी स्त्री नहीं, जो एक बार में आभूषण पसंद करके खरीद लेती हो। किसी का डिजाइन भाता है तो किसी की फिटिंग नहीं हो पाती, कभी सब पसंद आ जाता है तो जेब पर भारी पड़ता है। गहनों की जगमग दुनिया से एक जगमगाता आभूषण चुनना बहुत मुश्किल होता है।
औरतों के साथ शॉपिंग करना सबसे मुश्किल काम है..। अमूमन पुरुषों का यही मानना है और यह बात पूरी तरह सच साबित होती है, जब वे ज्यूलरी शो-रूम में बैठी होती हैं। फिर भी कुछ टिप्स हैं, जो मुश्किल कम कर सकते हैं। अगली बार कुछ खरीदने जाएं तो इन्हें पढ़ लें।
1. जब आप ड्रेस खरीदती हैं तो उसे ट्रायल रूम में पहनकर देखती हैं। ज्यूलरी को भी पहनकर जरूर देखें। सुंदरता के साथ यह भी जरूरी है कि वह आप पर अच्छी लगे और सुविधाजनक हो।
2. पहली नजर में कुछ आपको लुभा रहा है और वह पॉकेट के माफिक भी है तो उसे खरीद लें। ये न सोचें कि सिल्वर है या गोल्ड, असली है या नकली। कई बार पहली नजर में कुछ पसंद आता है, इसके बाद दर्जनों चीजें देखने के बावजूद कुछ अच्छा नहीं लगता। क्योंकि पहली चीज मन पर छाई होती है। उसे खरीद लें, अगली बार का इंतजार न करें।
3. कोई ऐसा ट्रेंडी पीस लेना चाहती हैं, जो लंबे समय तक स्टाइल में नहीं रहेगा तो कॉस्ट्यूम ज्यूलरी खरीदें। ये असली नहींहोती, साथ ही कुछ सस्ती भी मिल जाती है।
. 4लंबे समय के लिए आभूषण खरीदना चाहती हैं तो क्लासिक डिजाइनर ज्यूलरी लें। ये महंगी होती है, लेकिन जिंदगी भर साथ देती है।
5. आभूषण व्यक्तित्व को बदल देते हैं। इनमें प्रयोग करना सीखें। कई बार एक बोल्ड पीस आउटफिट की खूबसूरती को दुगना कर देता है। लेकिन इसे पहनकर आईना जरूर देख लें कि यह आप पर फब रहा हो।
6. कुछ भी ऐसा न लें, जिसे लेने में थोड़ी हिचक हो। क्योंकि बाद में भी उसे पहनने में आपको जरूर हिचक होगी।
7. हड़बड़ी में आभूषण न खरीदें। दो-तीन स्थानों पर अवश्य जांच-परख लें। गुणवत्ता, डिजाइन, रंग, मूल्य, हॉलमार्किंग जैसे पहलुओं पर विचार करने के बाद ही आभूषण खरीदें।
8. ज्यूलरी की ऑनलाइन खरीदारी करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें। तकनीकी जानकारियों के अलावा यह भी जरूर देख लें कि अपनी फिटिंग बिलकुल सही बताएं।
9. यह भी ध्यान दें कि आभूषण किस अवसर-आयोजन या स्थान पर पहना जाना है। बड़ा सा चोकर किसी खास शाम के लिए बेहतर हो सकता है, लेकिन उसे पहनकर आप कंप्यूटर पर काम नहींकर सकतीं।
10. किसी एक डिजाइनर, ब्रैंड या शो-रूम के नाम पर न जाएं। जरूरी नहींकि आपका ज्यूलरी बॉक्स डिजाइनर ज्यूलरी से भरा हो। कई बार ब्रैंड के अलावा भी खूबसूरत पीस दिखते हैं, जो स्टाइल स्टेटमेंट बना सकते हैं।
11. अपने कद और चेहरे के हिसाब से गहने खरीदें। चेहरा छोटा है तो बहुत बड़ा पीस अच्छा नहींलगेगा। उम्र कम है तो पारंपरिक आभूषणों के बजाय हलके और सस्ते डिजाइनर पीस लें। इसी तरह अधिक उम्र में शैंडलियर के बजाय छोटे व शालीन डिजाइन वाले टॉप्स खरीदें।



ल़ेजर तकनीक से पाएं बेदाग त्वचा


चेहरे पर एक छोटा सा दाग या एक्ने चेहरे की सुंदरता को खराब कर देता है। यदि चेहरे पर मुंहासों जैसे ढेर सारे दाने पास-पास और गुच्छे की शक्ल में हों और बहुत दिनों तक बनें रहे तो सावधान हो जाइए। यह एक्ने हो सकता है। अगर आपके परिवार में एक्ने की हिस्ट्री रही है यानी आपके मां या पिता को भी यह समस्या रही है तो भी आपको इससे बचाव की कोशिशें शुरू कर देनी चाहिए। दरअसल, एक्ने मुंहासों का बिगड़ा हुआ रूप है। फर्क यह है कि आमतौर पर मुंहासे जहां बिना किसी विशेष उपचार के किशोरावास्था के बाद स्वयं ही ठीक हो जाते है, वहां एक्ने के साथ ऐसा नहीं होता। जब तक कि इनकी देखभाल ठीक से न की जाए तब तक यह ठीक नहीं होते। समस्या तब और बढ़ जाती है जब इनके निशान या दाग चेहरे पर पड़ जाते है। यह दाग किसी भी युवती के लिए नागवार होते है।
क्यों होते है मुंहासे
त्वचा के नीचे स्थित सिबेशियस ग्लैंडं्स से त्वचा को नमी देने के लिए तेल निकलता है। ये ग्लैडं्स चेहरे, पीठ, छाती और कंधों पर सबसे ज्यादा होती है। अगर यह ज्यादा सक्रिय हो जाएं तो रोमछिद्र चिपचिपे होकर ब्लॉक हो जाते है और उनमें बैक्टीरिया पनपने लगते है। जो मुंहासे का कारण बनते है। सिबेशियस ग्लैड की अति सक्रियता की प्रमुख वजह एंड्रोजन हार्मोन की अधिकता है। एंड्रोजन पुरुष सेक्स हार्मोन है और यह लड़के-लड़कियों दोनों में ही होता है। किशोरावास्था में इसका सीक्रिशन ज्यादा होता है इसलिए उन दिनों ऐसी मुंहासों की समस्या से गुजरना पड़ता है। यही मुंहासे बिगड़कर एक्ने का रूप ले लेते है।
कुछ ऐसे लोग भी है जो मुंहासे फोड़ देते है और उन पर डेटॉल या सेवलॉन का घोल लगाते है, यह सोचकर कि शायद ऐसा करने से उनके घाव भर जाएंगे। लेकिन मुंहासों को फोडऩे से संक्रमण पर पूरी त्वचा पर फैल जाता है और उनके दाग भी जरूर पड़ते है। मुंहासों के निकलने के कुछ अन्य कारण भी है मसलन एलर्जी, तनाव, जंकफूड, हाइड्रोजेनेटेड फैट और पशु उत्पादों के प्रयोग, कुपोषण और प्रदूषण से भी इनकी संभावना बढ़ जाती है। कुछ दवाओं जैसे स्टीरॉयड, ओरल, कांट्रेसेप्टिव पिल्स और मिरगी की दवाओं आदि के रिएक्शन से भी मुंहासे हो सकते है।
बचाव संभव है
कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो मुंहासों को रोका जा सकता है, कम से कम उनका ज्यादा बढऩा तो रोका ही जा सकता है। बेहतर होगा कि मुंहासे निकलते ही उनकी रोकथाम के उपाय शुरू कर दिए जाएं।
अगर आप इनसे बचना चाहती है तो अपने आहार पर खास ध्यान देना होगा। भोजन में अधिक तेल, मसाले से परहेज करना होगा।
इसके अलावा रेशेयुक्त पदार्थो का सेवन अधिक करे। इससे पेट साफ रहता है और शरीर के विषाक्त पदार्थ भी बाहर निकल जाते है। क्योंकि पेट की खराबी भी मुंहासों का एक विशेष कारण होता है। अधिक मीठा, स्टार्चयुक्त भोजन से जहां तक हो सके बचें।
कैसे जाएं मुंहासों के निशान
आज की व्यस्त जीवन शैली में समय के अभाव के कारण मुंहासों के दाग दूर करने के लिए घंटों चेहरे पर लेप लगाना और उबटन का इस्तेमाल करने से हर स्त्री बचना चाहती है। ऐसे में लेजर तकनीक काफी सुविधाजनक है। लेजर तकनीक मुंहासों का अच्छा इलाज है। इसके जरिये त्वचा के दाग-धब्बे दूर हो जाते है और आपको मिलती है एक निर्दोष, बेदाग त्वचा। इस लेजर चिकित्सा में आपकी त्वचा की कोशिकाओं का पानी लेजर की किरण सोख लेता है। इस क्रिया से कोशिकाओं का तात्कालिक वाष्पीकरण होता है या वे नष्ट हो जाती है। न्यू लुक लेजर क्लीनिक, लाजपत नगर, नयी दिल्ली के कंसल्टेट डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर अनिल के अनुसार लेजर चिकित्सा के जरिये प्रभावित त्वचा को हटा दिया जाता है और उसके जगह नयी त्वचा निकल आती है। लेजर चिकित्सा के बाद त्वचा कुछ समय तक गुलाबी रहती है पर धीरे-धीरे त्वचा निर्दोष और सामान्य नजर आती है। इसके लिए आपकी त्वचा को देख कर और मुंहासों की स्थिति को ध्यान में रखकर आपको यह परामर्श दिया जाता है कि आपको लेजर ट्रीटमेंट की कितनी सिटिंग लेने की जरूरत होगी। इसके साथ ही डॉक्टर के निर्देशानुसार कुछ दिनों तक आपको सूर्य की किरणों से भी त्वचा का बचाव करना होता है। साथ ही एसपीएफ-18 की सनस्क्रीन का भी प्रयोग करना होता है। लेकिन आपको मिलती है एक सुंदर, स्वस्थ और बेदाग त्वचा।

डैंड्रफ के लिए सिरका




सिरके का प्रयोग कई रूपों में किया जाता है। इतना ही नहीं सिरका कई प्रकार का होता है। क्या आप जानते हैं आयुर्वेद में सिरके का प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता है। आप अपने बालों को सुंदर बनाने के लिए भी सिरके का प्रयोग कर सकते हैं। जी हा, सिरका बालों के लिए अच्छा है यानी आप यदि बालों की किसी समस्या से निजात पाना चाहते हैं तो आपको सिरके का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके साथ ही आपको ये भी पता होना चाहिए कि सिरके का इस्तेमाल बालों के लिए कैसे किया जाता है। आइए जानें डैंड्रफ के लिए सिरके के इस्तेमाल के बारे में।
बालों के लिए सिरके के फायदे
-बालों को सुंदर बनाने के लिए सिरके का प्रयोग किया जाता है। डेंड्रफ, जूं जैसी समस्याओं से बचने के लिए सिरके का प्रयोग लाभकारी है।
-बालों की प्राकृतिक रूप से देखभाल के लिए भी सिरके का प्रयोग किया जा सकता है।
-बालों की अच्छी तरह से सफाई और बालों को स्व्स्थ रखने में सिरके का इस्तेमाल किया जाता है।
-बालों की कंडीशनिंग के लिए भी सिरके का इस्तेमाल किया जा सकता है।
-बालों में होने वाले फुंसी, फंगस और इसी तरह की अन्य समस्याओं को दूर करने और बैक्टीरिया इत्यादि को नष्ट करने में भी सिरके का प्रयोग किया जाता है।
-बालों की चमक बरकरार रखने के लिए और बालों को मुलायम और सुंदर बनाने के लिए सिरके से किफायती कुछ भी नहीं।
-सिरके से बालों को सीधा भी किया जा सकता है। यदि रूखे और घुंघराले बालों को सीधा करना है तो सिरके का प्रयोग करना चाहिए। ऐसे में आपको चाहिए कि आप सेब के सिरके से बालों को धोएं और इससे जल्द ही आप बाल सीधे कर पाएंगे।
सिरके का इस्तेमाल
-डैंड्रफ बालों के लिए एक बड़ी समस्या होती है, ऐसे में यदि आप डैंड्रफ से छुटकारा पाना चाहे तो भी सिरके का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके लिए आपको अच्छी तरह से बालों की जड़ों पर सिरके से तकरीबन आधे घटे तक मालिश करनी चाहिए और उसके बाद बाल धो लेने चाहिए। ऐसा आप सप्ताह में 2- 3 बार करिए आप पाएंगे कि आपके बालों से डैंड्रफ एकदम गायब हो गई है। इससे डैंड्रफ के कारण हो रही खुजली भी जाती रहेगी।
-इतना ही नहीं यदि स्कॉल्प की त्वचा रुखी है और आपको डैंड्रफ भी हो गई र्है तो आप बालों को धोने के बाद सिरके और थोडा सा बादाम का तेल मिलाकर स्कॉल्प पर अच्छी तरह से लगाएं । इससे स्कॉल्प में नमी भी आएगी और दोबारा कभी डैंड्रफ की समस्या भी नहीं होगी।
-बालों में शैंपू करने के बाद लगभग एक लीटर पानी में करीब 75 मिलीलीटर सिरके का घोल तैयार करना चाहिए और उसे बतौर कंडीशनर इस्तेमाल करना चाहिए।
-बालों को प्राकृतिक रूप से मजबूती देने के लिए बालों में सिरके का इस्तेमाल करना चाहिए। यदि आपकी स्कॉल्प ऑयली है तो आपको बाल धोने से पहले नींबू के रस के साथ मिलाकर सिरका लगाना चाहिए।
-अब आप ना सिर्फ सिरके के इस्तेमाल से डेंड्रफ से आसानी से निजात पा सकतें हैं बल्कि बालों को रेशमी बनाने के लिए भी सिरका बहुत लाभकारी है।




Sunday, April 14, 2013

खाएं चीज, मजबूत होगा शरीर



चीज को आमतौर पर स्वाद से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह आपकी सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद है। इसके इस्तेमाल के तरीके और मात्रा के बारे में जानकारी हासिल कर लें तो यह आपकी सेहत का दोस्त साबित होगा।
चीज देखते ही आपका मन ललच उठता है लेकिन आप यह सोचकर अपने ऊपर कंट्रोल कर लेते हैं कि कहीं यह मोटापा न बढ़ा दे। अगर संतुलित मात्रा में चीज लिया जाए तो यह कभी भी मोटापा नहीं बढ़ाएगा। चीज मानव शरीर के लिए बेहद फायदेमंद है। कई तरह के विटामिन, मिनरल्स और प्रोटीन से भरपूर चीज मानव शरीर के लिए बेहद जरूरी है। इसलिए इसे अपने खाने की थाली में शामिल करना अतिआवश्यक है।
मजबूत हड्डी के लिए जरूरी है चीज
शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए मजबूत हड्डी का होना जरूरी है। मजबूत हड्डी शरीर को मजबूती प्रदान कर हमें हमेशा तंदुरुस्त रखती हैं। मजबूत हड्डी के लिए कैल्शियम बेहद जरूरी है। चीज में कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह हड्डियों को मजबूत करने में अहम भू्मिका निभाता है। आम आदमी के साथ-साथ छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुर्जुगों के लिए भी यह काफी फायदेमंद होता है।
चीज से चमकें आपके स्वस्थ दांत
स्वस्थ दांत किसे नहीं पसंद है। अगर स्वस्थ और सुंदर दांत नहीं होंगे तो आप खुलकर अपनी मुस्कुराहट भी नहीं बिखेर सकेंगे। अगर दांतों को सुंदर और स्वस्थ बनाए रखना चाहते हैं तो जमकर चीज खाएं। चीज कैल्शियम का भंडार है, जिससे दांत मजबूत और स्वस्थ बनते हैं और उनकी खूबसूरती हमेशा बरकरार रहती है।
प्रोटीन का खजाना
किसी भी शाकाहारी व्यक्ति के लिए चीज से बेहतर कुछ और हो ही नहीं सकता है। चीज प्रोटीन से भरपूर होता है और इसका प्रोटीन काफी उच्च क्वालिटी का होता है। इससे शरीर चुस्त और दुरुस्त बनता है।
अच्छी नींद आएगी
कई शोध से पता चला है कि रात को सोने से पहले चीज खाने से काफी सूकून भरी नींद आती है। इतना ही नहीं चीज में ट्राइप्टोफैन पाया जाता है। ट्राइप्टोफैन एक एमिनो एसिड है जो तनाव को दूर करता और सुकून लाता है।
बढ़ाता है रोग-प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम)
चीज में विटामिन ए, विटामिन बी12 जैसे कई तरह के विटामिन, जिंक, फॉस्फोरस, कैल्शियम आदि पाए जाते हैं। ये सभी हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए फायदेमंद हैं।
चीज के प्रकार और उनका इस्तेमाल
ब्रेड पर लगाने के लिए सॉफ्ट चीज प्रयोग में लाना चाहिए।
सेमी-सॉफ्ट चीज कुकिंग के लिए सही होता है। अगर आप चीज को गर्म कर कोई कुकिंग आइटम बनाना चाहते हैं तो इसके लिए सेमी-सॉफ्ट चीज सबसे उपयुक्त रहेगा।
सलाद में चीज का इस्तेमाल अब आम हो गया है। अगर आप भी अपने सलाद में चीज का इस्तेमाल करना चाहते है तो फ्रेश चीज इसके लिए सबसे उपयुक्त रहेगा।
कुकिंग के लिए हार्ड चीज का भी इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा।
चीज के नुकसान
चीज में काफी फैट और कैलोरी होता है। अगर इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया जाए तो यह वजन बढ़ाने का काम कर सकता है। ऐसा नहीं है कि आप वजन बढ़ने के डर से चीज न खाएं। चीज खाएं, लेकिन अपनी सेहत का ख्याल रखते हुए। हाइपरटेंशन, हार्ट, किडनी और स्टोन के मरीजों को चीज से परहेज करना चाहिए। चीज में सोडियम भी पाया जाता है। यह हाइपरटेंशन, किडनी, स्टोन और दिल के मरीजों के लिए हानिकारक होता है।

बदलते मौसम में बरतें सावधानी



आजकल तापमान में उतार-चढ़ाव शुरू हो गया है। दिन का तापमान बढ़ जाता है तो रात में पारा लुढ़क जाता है। ऐसे में थोड़ी असावधानी आपकी सेहत बिगाड़ सकती है। खासकर अगर आपका शरीर कमजोर है तो ऐसी लापरवाही काफी महंगी भी साबित हो सकती है।
घर से निकलते वक्त धूप ने इस कदर उत्साहित किया कि शरीर पर गर्म कपड़ों की संख्या कम कर दी। शाम में दफ्तर से निकले तो धीरे-धीरे बढ़म् रही सर्द हवा ने ठंडक का अहसास कराया। ऐसे में थोड़ी भी लापरवाही सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। इस कारण आजकल सर्दी, जुकाम से लेकर बुखार तक की समस्याएं सामने आ रही हैं। खासकर छोटे बच्चों, वैसी महिलाएं जिन्हें एनीमिया की समस्या है, मधुमेह और टीबी के मरीज, एड्स रोगी आदि इस मौसम में काफी परेशानी महसूस करने लगते हैं।
आमतौर पर उत्तरी भारत में 26 जनवरी के बाद गर्मी की धमक पड़ने लगती है। अभी हम उसी मौसम से गुजर रहे हैं। धीरे-धीरे मौसम बदलता जाएगा, जिसमें दिन में गर्मी और रात में ठंडक रहेगी। इस मौसम में लोग कपड़े हटाने या कम करने की कोशिश करने लगते हैं। लेकिन यह कोशिश उन्हें बुखार और सांसों की बीमारी से लेकर अटैक तक का झटका दे सकती है। वैसे अभी उतना अधिक घबराने वाला मौसम तो नहीं है, लेकिन वायरल अटैक और बुखार, जुकाम का मौसम तो है ही। खासकर कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग आजकल इसकी चपेट में आ रहे हैं और हॉस्पिटल पहुंच रहे हैं।
बरतें विशेष सावधानी
आजकल डॉक्टरों के पास पहुंचने वाले रोगियों में बुखार और सांस की समस्या से पीडित लोग अधिक हैं। उनमें ज्यादातर छोटे बच्चे, बुजुर्ग, कमजोर महिलाएं हैं। अगर आप मधुमेह के शिकार हैं या टीबी से पीडित हैं या एड्स की गिरफ्त में हैं, तो आप भी इस वायरल के प्रभाव में आ सकते हैं, क्योंकि इस मौसम के वायरस कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वालों पर अपना असर छोड़ने में सफल हो रहे हैं। अभी का बुखार आमतौर पर साफ-सफाई का थोड़ा खयाल रखने से 5-7 दिनों में खुद ही ठीक हो जाता है। सावधानियां न बरती जाएं और बुखार लगातार जारी रहे तो निमोनिया या फेफड़े में संक्रमण की समस्या हो सकती है। इसके बाद तो आपको अच्छी तरह से पूरा डॉक्टरी इलाज कराना ही पड़ेगा।
खाने में बरतें सावधानी
आजकल शादी और पार्टियां खूब हो रही हैं। यानी यह मौसम बाहर खाने-पीने का भी है। वहां खाने-पीने पर पर्याप्त ध्यान नहीं देने से आप उल्टी, दस्त आदि के शिकार हो सकते हैं। यह फूड प्वायजनिंग या एनिवायसिस की समस्या के कारण होता है। छोटे बच्चे इस मौसम में पानी पीना पसंद नहीं करते। ऐसे में अगर दस्त हो जाए तो डिहाइड्रेशन की समस्या सामने आती है और बच्चे को हॉस्पिटल ले जाना पड़ता है।
संक्रमण से बचना है जरूरी
यह वायरल इंफेक्शन का मौसम है। यह वायरस बस, मेट्रो आदि में तो आपका हमला कर ही सकता है, आपके घर में भी आपके ऊपर इसका हमला हो सकता है। इससे बचाव के लिए सबसे जरूरी है साफ-सफाई। चाहे आप दफ्तर में रहें या घर में, बार-बार हाथ धोते रहें। बाहर से घर लौटें तो हाथ और चेहरा को अच्छी तरह धोएं। अगर आपको खांसी हो रही है तो खांसते समय मुंह पर रुमाल जरूर रखें ताकि सामने वाला संक्रमित न हो। सामने कोई दूसरा व्यक्ति खांस रहा है तो आप वहां से हट जाएं, अन्यथा आप भी उस वायरस की चपेट में आ सकते हैं। जुकाम की स्थिति में नाक साफ करने के लिए अलग से रुमाल रखें और उसकी सफाई भी अलग ही करें।
आप मधुमेह से पीडित हैं तो 
इस मौसम में मधुमेह से पीडित रोगियों को खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है। शुगर से परहेज करें और दवाओं का नियमित रूप से सेवन करें, अन्यथा आपको अटैक पड़ सकता है। यह अटैक ब्रेन का भी हो सकता है और हार्ट का भी। इसलिए खानपान का खयाल रखें, पूरा परहेज करें और नियमित व्यायाम करें। अगर आप ड्रिंक करते हैं तो इस मौसम में उसका इस्तेमाल बिल्कुल छोड़ दें।
ग्रीन टी
अगर आपको चाय पीना पसंद नहीं तो आप ग्रीन टी का भी सेवन कर सकते हैं। ग्रीन टी आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक है। ग्रीन टी को बनाते वक्त आप इसमें तुलसी, छोटी इलायची आदि का भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके अलावा आप ग्रीन टी बनाने के लिए चाय की हरी पत्तियों को आजमा सकते हैं। कुछ अलग स्वाद के लिए मिंट, लेमन आदि के स्वाद की पत्तियों को बाजार से खरीद सकते हैं। ये आपको कहीं भी बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाएंगी। ग्रीन टी पीने के बहुत से फायदे होते हैं। ब्लड प्रेशर और बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल, दिल की बीमारियों, कैंसर जैसी बीमारियों में रोकथाम करता है।
सर्दियों में फायदेमंद हॉट ड्रिंक्स
सर्दी की बात हो, तो ऐसे मौसम में घर से बाहर जाने का मन शायद ही किसी का करता होगा। लेकिन इस कंपकंपाती ठंड में बाहर जाना मजबूरी भी है और जरूरी भी। हर कोई चाहता है कि कुछ भी करें, लेकिन शरीर को गर्म रखें, ताकि ठंड से बचा जा सके। इस मौसम में अधिकतर लोग फ्लू, वायरल इंफेक्शन और ठंड लगने के कारण बीमार हो जाते हैं। यकीनन सर्दी में आप सभी गर्म पेय पदार्थो को पीना पसंद करते होंगे और उन गर्म पेय पदार्थो में चाय, कॉफी और सूप का नाम शामिल होता हो। लेकिन चाय, कॉफी का अधिक सेवन आपके स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव भी डालते हैं। हर व्यक्ति की पसंद अलग होती है। किसी को चाय पसंद नहीं है तो किसी को कॉफी और सूप। लेकिन इन सबके अलावा भी कुछ ऐसे गर्म पेय पदार्थ हैं जो सर्दियों में आपके स्वास्थ्य और सेहत दोनों का ख्याल रखते हैं।
निसाफता 
कॉफी, सूप पीना पसंद नहीं, तो सर्दियों में निसाफता आपके लिए हॉट ड्रिंक के रूप में अच्छा विकल्प है। इस ड्रिंक को बनाना बहुत आसान है। पहले बादाम को अच्छे से पीस लें। पीसे हुए बादाम को दूध में डालें और कुछ समय तक उबलने दें। अब इसमें स्वाद के लिए खसखस, काली मिर्च, मोटी इलायची और खरबूजे के बीज डालकर दूध के साथ उबालें। इसे गर्मागर्म पिएं। इसके बहुत सारे फायदे भी है। यह ड्रिंक आपको सर्दी जुकाम से बचाएगी।
काले चने और मूंग दाल का सूप
सूप में कुछ अलग आजमाना चाहते हैं, तो काले चने और मूंग दाल का सूप हेल्दी भी होता है और स्वादिष्ट भी। इन्हें पीसकर पेस्ट बना लें और जैसे सूप बनता है वैसे ही बनाएं। स्वाद के लिए काली मिर्च आदि मिलाएं। इससे अच्छा टेस्ट आएगा।
मुलैठी
मुलैठी के बारे में तो आपने सुना ही होगा। यह एक हर्ब है। बहुत गर्म होती है और इस मौसम में इसका सेवन करना फायदेमंद होता है। मुलैठी को पानी में डालकर उबाल लें। इसमें चीनी, तुलसी और इलायची को मिक्स कर लें। सर्दियों में यह गर्म पेय पदार्थ आपके शरीर को गर्म रखेगा। साथ ही खांसी, जुकाम से बचाएगा।
दही
दही का नाम सुनते ही आप हैरान हो कर यही सोचने लगे ना कि दही तो ठंडी होती है। सर्दियों में इसका सेवन कैसे कर सकते हैं। लेकिन हमारे पास इसका भी हल है। आप दही को पतला कर उसमें थोड़ी सी काली मिर्च, इलायची आदि मिलाएं और फिर इसे उबाल लें। गर्म मसाले मिलाने पर ठंडापन दूर हो जाएगा ।
दमे के रोगी एलर्जी से रहें दूर
इस बदलते मौसम में दमे के रोगियों की समस्या बढ़ जाती है। यह एक एलर्जिक बीमारी है, जिसमें सांस का रास्ता फूल जाता है और सांस मार्ग सिकुड़ जाता है। इससे सांस की तकलीफ बढ़ जाती है। ऐसे में वायु प्रदूषण, धूल, सिगरेट का धुआं, पालतू जानवरों के फर आदि नुकसानदेह साबित होते हैं। आपके बागीचे में खिले फूलों के पराग कण भी अभी आपके लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं। इसलिए आपको जिन चीजों से एलर्जी हो, उनसे दूर रहें। आपकी जो दवाएं चल रही हैं, उन्हें नियमित रूप से लें। आपके डॉक्टर ने इन्हेलर दी है तो उसे हमेशा अपने पास रखें। धूल मिट्टी वाली जगहों से बचें। अगर आपको घर में पालतू जानवरों से एलर्जी है तो इस मौसम में उससे भी बचना होगा।
आहार हो हेल्दी
इस मौसम में पौष्टिक और संतुलित आहार लें। यह आपके शरीर की जरूरत पर निर्भर करेगा। तरल पेय, सूप आदि का प्रयोग अधिक से अधिक करें। खाना को 5-6 बार में बांटकर लें और समय-समय पर पेय पदार्थ लेते रहें। अगर आपका शरीर कमजोर है तो अपने भोजन में हरी सब्जियां, फल, जूस, सूप आदि का प्रयोग ज्यादा करें।