Monday, April 29, 2013

ऐसे करें सिविल सर्विसेज की तैयारी



यूपीएसएसी के सिविल सर्विसेज एग्जाम का प्रिलिम्स 26 मई को होगा। पिछले कुछ सालों के दौरान इस एग्जाम में तमाम बदलाव हुए हैं। इस साल से मेन्स में भी कुछ नए नियम लागू कर दिए गए हैं। इन तमाम बदलावों के बीच कैसे करें इस प्रतिष्ठित एग्जाम की तैयारी जाने :-

यूपीएससी द्वारा आयोजित की जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे प्रमुख और सम्मानित परीक्षा है। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा निर्देशित नियमों के मुताबिक अखिल भारतीय सेवाओं और केंद्रीय सेवाओं के ग्रुप क और ग्रुप ख पदों पर भर्ती के लिए यूपीएससी हर साल सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन करता है। आयोग हर साल फरवरी, मार्च में इसके लिए विज्ञापन निकालता है। मई के तीसरे या चौथे रविवार को प्री, नवंबर में मेन्स और अगले साल मार्च-अप्रैल में इंटरव्यू का आयोजन किया जाता है। फाइनल रिजल्ट मई के पहले या दूसरे हफ्ते तक घोषित कर दिया जाता है। जहां तक कुल वेकेंसी का सवाल है तो यह अमूमन 900 से 1100 के बीच होती हैं। इस साल सिविल सेवा प्री एग्जाम का आयोजन 26 मई को होना है। मेन्स एग्जाम 8 नवंबर से होंगे।

बदलाव की बात
- यूपीएससी ने इस साल यानी 2013 से सिविल सेवा परीक्षा में सुधार के लिए परीक्षा के तरीके में कुछ बदलाव किया है। इस नए फॉर्मैट में अब जनरल स्टडीज पर ज्यादा जोर दिया जाएगा।
- मेन्स एग्जाम में पहली बार जनरल स्टडीज के सिलेबस में नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और ऐप्टिट्यूड को शामिल किया गया है। डीओपीटी ने तमाम पेपर्स के अधिकतम अंकों के मामले में भी अच्छा खासा बदलाव किया है।
- सिविल सेवा मेन्स एग्जाम 2013 से जनरल स्टडीज के 250-250 अंकों के चार अनिवार्य पेपर होंगे।
- उम्मीदवार द्वारा चुने गए किसी एक ऑप्शनल सब्जेक्ट के दो पेपर भी 250-250 अंकों के होंगे।
- निबंध के पेपर को 200 से बढ़ाकर 250 कर दिया गया है।
- इंटरव्यू के 300 अंकों को घटाकर अब 275 कर दिया गया है।
- पहले जनरल स्टडीज के केवल दो अनिवार्य पेपर 300-300 अंकों के होते थे और दो ऑप्शनल सब्जेक्ट में हरेक के दो-दो पेपर 300-300 नंबर के होते थे।

शैक्षणिक योग्यता
- कैंडिडेट के पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी की ग्रैजुएशन डिग्री या समकक्ष योग्यता होनी चाहिए।
- ग्रैजुएशन के फाइनल इयर के उम्मीदवार भी प्री एग्जाम में शामिल हो सकते हैं, लेकिन जब वे मेन्स के लिए अप्लाई करेंगे तो उन्हें ग्रैजुएशन की डिग्री हासिल कर लेने का सर्टिफिकेट पेश करना होगा।

उम्र
- जनरल कैटिगरी के कैंडिडेट की उम्र 21 से 30 साल के बीच होनी चाहिए।
- ओबीसी के उम्मीदवारों के मामले में अधिकतम तीन साल, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार के लिए अधिकतम पांच साल की छूट का प्रावधान है।
- उम्र की गणना के लिए विज्ञप्ति प्रकाशन वाले साल के अगस्त महीने की पहली तारीख को मानक माना जाता है।

अवसरों की संख्या
- जनरल कैटिगरी के कैंडिडेट को चार बार और ओबीसी कैंडिडेट्स को सात बार परीक्षा में शामिल होने का मौका मिलता है।
- अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए अवसरों का कोई प्रतिबंध नहीं है।
- यहां यह जानना भी जरूरी है कि प्री एग्जाम के किसी भी पेपर में शामिल होने को ही अवसर के रूप में गिना जाता है, सिर्फ अप्लाई करने को नहीं।

रिजर्वेशन
- इस एग्जाम में सरकार द्वारा तय तरीके से अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, ओबीसी और शारीरिक रूप से अक्षम उम्मीदवारों के लिए आरक्षण की व्यवस्था है।
- अनुसूचित जातियों के लिए 15%, अनुसूचित जनजातियों के लिए 7.5% और ओबीसी के लिए 27% तक आरक्षण दिया जाता है।

सिविल सर्विसेज एग्जाम-2013 से जुड़ी जरूरी इंफर्मेशन...
26 मई को होगा सिविल सर्विसेज-2013 प्री एग्जाम
8 नवंबर से होगा सिविल सर्विसेज-2013 मेन्स एग्जाम
मार्च-अप्रैल 2014 में होगा इंटरव्यू
275 अंकों का होगा अब इंटरव्यू, पहले था 300 का
1000 से 1100 तक होती हैं कुल वैकेंसी
5 लाख के करीब भरे जाते हैं कुल फॉर्म
13 गुना (कुल वेकेंसी का) कैंडिडेट्स शामिल होते हैं मेन्स एग्जाम में
करीब 3 गुने (कुल वेकेंसी का) कैंडिडेट्स शामिल होते हैं इंटरव्यू में

एग्जाम
सिविल सेवा परीक्षा के दो चरण होते हैं:
1. मेन्स एग्जाम के लिए उम्मीदवारों के चयन के लिए सिविल सेवा प्री एग्जाम होता है। यह ऑब्जेक्टिव होता है।

2. प्री क्वॉलिफाई करने वाले लोगों को सिविल सेवा मेन्स एग्जाम देना होता है, जिसमें लिखित परीक्षा के अलावा इंटरव्यू भी होता है।

एग्जाम में बैठने का फैसला लेने से एक साल पहले या अगर ग्रैजुएशन कर रहे हों तो इसके फाइनल इयर से इसकी तैयारी शुरू कर दें। तैयारी शुरू करने से पहले सिलेबस, प्रश्न-पत्र, उपयोगी पत्र-पत्रिकाओं, न्यूज पेपरों, किताबों और दूसरे सभी पहलुओं की सूची बनाकर सिलसिलेवार ढंग से तैयारी शुरू करनी चाहिए।

1. प्री एग्जाम

- प्री एग्जाम में ऑब्जेक्टिव टाइप के 200-200 अंकों के दो पेपर होते हैं। यह एग्जाम सिर्फ उसी साल के मेन्स एग्जाम के लिए कैंडिडेट्स की स्क्रीनिंग के लिए होता है।
- इस एग्जाम में मिले नंबरों को फाइनल मेरिट लिस्ट में नहीं जोड़ा जाता।
- मेन्स एग्जाम में शामिल होने वाले योग्य कैंडिडेट्स की संख्या विज्ञप्ति में प्रकाशित कुल वेकेंसी की संख्या का लगभग 12 से 13 गुना होती है।
- यूपीएससी मेन्स एग्जाम में शामिल होने के लिए कैंडिडेट का चयन प्री में मिले नंबरों के आधार पर करता है।

रूपरेखा
- प्री में जनरल स्टडीज के पहले पेपर में 100 ऑब्जेक्टिव प्रश्न होते हैं।
- दूसरे पेपर सिविल सर्विसेज ऐप्टिट्यूड टेस्ट (सीसेट) में 80 ऑब्जेक्टिव प्रश्न होते हैं।
- दोनों पेपरों के लिए 200-200 अंक निर्धारित हैं।
- हर पेपर को 2 घंटे के भीतर हल करना होता है।
- प्रश्नों के उत्तर देने के लिए ओएमआर शीट पर सही गोले को काले बॉल पेन की मदद से रंगना होता है।
- हर प्रश्न के लिए चार ऑप्शन होते हैं। गलत उत्तर के लिए एक तिहाई अंक कट जाता है।
- सीसेट के डिसिजन मेकिंग वाले प्रश्नों में निगेटिव मार्किंग न होकर सबसे सही से लेकर कम सही तक क्रमश: अंकों में कमी आती जाती है।

तैयारी
- जहां तक तैयारी का सवाल है तो सबसे पहले उम्मीदवार को जनरल स्टडीज के विभिन्न भागों की एक सामान्य समझ विकसित करने की कोशिश करनी चाहिए। इसके लिए कक्षा 7 से लेकर 12 तक की भूगोल, इतिहास, राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र, विज्ञान आदि महत्वपूर्ण विषयों की टेक्स्ट बुक का अध्ययन करना चाहिए।
- जनरल स्टडीज के सिलेबस में भारत का इतिहास, भारत एवं विश्व भूगोल, भारतीय राजतंत्र और शासन, पर्यावरण, आर्थिक और सामाजिक विकास, पर्यावरण, पारिस्थितिकी, जैव-विविधता और सामान्य विज्ञान को शामिल किया जाता है। तैयारी के लिए इन सभी विषयों या टॉपिक्स को पूरी गहनता के साथ और समसामयिक घटनाक्रम से इन्हें जोड़कर पढ़ना चाहिए।
- अगर हम पिछले सालों के पेपर्स को गंभीरता से देखें तो हम पाते हैं कि अब तथ्यात्मक प्रकृति के प्रश्नों की तुलना में ऐसे प्रश्न ज्यादा आते हैं जिनसे यह पता चल सके कि आपके कॉन्सेप्ट कितने साफ हैं और आपको विषय की कितनी गहरी समझ है। इसलिए स्टूडेंट्स को तैयारी के दौरान विषय के सभी भागों का गहन अध्ययन करना चाहिए।
- भूगोल पढ़ते वक्त मानचित्रों, इंटरनेट आदि की मदद लेनी चाहिए।
- इतिहास पढ़ते वक्त इसके सभी भागों यानी प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक भारत का इतिहास की गंभीरता से पढ़ाई करनी चाहिए। हाल के सालों में समसामयिक घटनाक्रम को अलग से न पूछकर संबंधित विषयों की अवधारणा से जोड़कर पूछा जा रहा है। पढ़ते वक्त अर्थशास्त्र, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, भूगोल, राजनीतिक व्यवस्था के हालिया घटनाक्रम पर ध्यान देना जरूरी है। इसके लिए रोजाना कुछ अच्छे न्यूजपेपर और मैग्जीन्स पढ़नी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण इंटरनेट की सहायता जरूर लेनी चाहिए।
- दूसरे भाग सीसेट के सिलेबस में कॉम्प्रिहेंशन या बोधगम्यता संचार कौशल सहित इंटरपर्सनल स्किल, लॉजिकल रीजनिंग, ऐनालिटिकल एबिलिटी, सामान्य मानसिक योग्यता, बेसिक गणित, डाटा इंटरप्रटेशन और अंग्रेजी कॉम्प्रिहेंशन शामिल हैं।

सीसेट की तैयारी से जुड़े कुछ जरूरी और उपयोगी सुझाव ये हैं...
1. अंग्रेजी और हिंदी कॉम्प्रिहेंशन पर खास ध्यान देना चाहिए क्योंकि 40 से 50% प्रश्न यहीं से होते हैं।
2. इसके लिए ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिस करनी चाहिए।
3. रीजनिंग, मैथ्स और मानसिक योग्यता के प्रश्नों की रोज प्रैक्टिस करनी चाहिए।
4. अगर अंग्रेजी के प्रश्न को समझने या करने में कठिनाई हो तो अपने अंग्रेजी के ज्ञान को बेहतर करने की कोशिश करें।
5. कई बार कॉम्प्रिहेंशन के प्रश्न का हिंदी में अनुवाद जटिल होने के कारण दिक्कत आती है। वैसी स्थिति में प्रश्न के अंग्रेजी में छपे भाग से मदद लेनी चाहिए।

2. मेन्स एग्जाम

यह एग्जाम का सबसे महत्वपूर्ण व निर्णायक भाग है क्योंकि कुल प्राप्तांक का 85% से ज्यादा वेटेज इसी का होता है। इस परीक्षा में प्राप्त किए गए अंकों की अधिकता न केवल इंटरव्यू का रास्ता साफ करती है, बल्कि अंतिम रूप से चयन और मेरिट में ऊपर आने में भी निर्णायक भूमिका अदा करती है। इसलिए परीक्षा में शामिल विषयों और इनके अंकों पर नजर डालना जरूरी है:

- मेन्स एग्जाम में संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल भाषाओं में से उम्मीदवार द्वारा चुनी गई कोई एक भाषा और अंग्रेजी के पेपर मैट्रिकुलेशन स्तर के होते हैं, जिनमें केवल पास होना होता है। इन पेपरों में प्राप्त अंकों को फाइनल मेरिट में नहीं जोड़ा जाता।
- मेन्स में आए नए बदलाव द्वारा आयोग ने उम्मीदवारों के बीच वैकल्पिक विषयगत विषमता को दूर करते हुए सामान्य अध्ययन के क्षेत्र को ज्यादा बढ़ा दिया है। अपने उत्तर लिखने के लिए स्टूडेंट्स को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल किसी भी भाषा या अंग्रेजी में लिखने की छूट है।
- टाइम मैनेजमेंट कामयाबी की पहली कुंजी है।
- जनरल स्टडीज पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान देना बेहद जरूरी है।
- अप्लाई करने से पहले ही ऑप्शनल सब्जेक्ट का चयन और उसके पूरे सिलेबस की पढ़ाई पूरी कर लेनी चाहिए।
- अगर जनरल स्टडीज के सिलेबस के तहत शामिल विषयों से जुड़े ऑप्शनल सब्जेक्ट चुने जाएं तो तैयारी के दौरान काफी समय की बचत हो सकती है।
- उत्तर देते वक्त तय शब्द-सीमा का पालन करते हुए गैरजरूरी विस्तार से बचना चाहिए।
- मुख्य परीक्षा की तैयारी के दौरान लगने वाले समय को जनरल स्टडीज के लिए 60%, ऑप्शनल सब्जेक्ट के लिए 30% और निबंध के लिए 10% के रूप में बांटकर तैयारी करनी चाहिए।
- निबंध का अभ्यास बेहद जरूरी है। इसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए। कई उम्मीदवार परीक्षा भवन में ही अपना पहला निबंध लिखने के कारण इसका नुकसान उठाते हैं।
- आपके उत्तरों में मौलिकता झलकनी चाहिए। किसी कोचिंग संस्थान, किताब या किसी दूसरे स्त्रोत की पूरी नकल उतार देना सही नहीं है।
- उत्तर अगर समसामयिक घटना-क्रम से जुड़ रहा हो तो जरूर जोड़ें।
- उत्तर के महत्वपूर्ण भाग को अंडरलाइन, ग्राफ, चित्रों, मानचित्रों की मदद से पेश करना अच्छे नंबर लाने के लिए जरूरी है।
- जवाब में प्रश्न की मांग के मुताबिक उसके सभी भाग का अगर मुमकिन हो तो बिंदुवार उत्तर दें।
- ऑप्शनल सब्जेक्ट का चयन सोचसमझकर करें।

पेपर
अंक
संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल भाषाओं में से उम्मीदवार द्वारा चुनी गई कोई एक भारतीय भाषा
300
अंग्रेजी
300
निबंध
250
जनरल स्टडीज-1
(भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास एवं भूगोल और समाज)
250
जनरल स्टडीज-2
(भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास एवं भूगोल और समाज)
250
सामान्य अध्ययन-3
(प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण सुरक्षा, आपदा प्रबंधन)
250
सामान्य अध्ययन-4
(नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि)
250
ऑप्शनल सब्जेक्ट पेपर-1
250
ऑप्शनल सब्जेक्ट पेपर- 2
250
कुल योग
1750
इटरव्यू
275
टोटल
2025


3. इंटरव्यू

इंटरव्यू से पहले

परीक्षा का अंतिम पड़ाव इंटरव्यू है। मेन्स एग्जाम में कैंडिडेट द्वारा लाए गए अंकों में से आयोग द्वारा निर्धारित अंक हासिल करने वालों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। कैंडिडेट का मूल्यांकन एक बोर्ड करता है, जिसके प्रमुख यूपीएससी के मेंबर होते हैं। उनके अलावा 4 या 5 और सदस्य बोर्ड में शामिल होते हैं। इंटरव्यू की तैयारी मेन्स एग्जाम देने के 15 दिन बाद से शुरू करनी चाहिए और हर रोज इसके लिए 2 से 3 घंटे की तैयारी भरपूर होती है। तैयारी के लिए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स इस तरह हैं:

- न्यूजपेपर, पत्रिकाओं, न्यूज चैनलों को सरसरी निगाह से देखने की बजाय ध्यान लगाकर पढ़ना-सुनना चाहिए।
- चर्चा में रहे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के प्रासंगिक या ज्वलंत मुद्दों पर खास ध्यान देते हुए अपनी मित्र-मंडली से इसकी चर्चा करनी चाहिए।
- इंटरव्यू डायरी बनाकर उसके महत्वपूर्ण घटनाक्रमों, अपने बायो-डेटा से जुड़े सभी पहलुओं जैसे हॉबी, शिक्षण संस्थान आदि की पूरी जानकारी रखनी चाहिए।
- मॉक इंटरव्यू का अभ्यास करना चाहिए।
- अपने इंटरव्यू का विडियो बनाकर अपनी कमियों को जानने की कोशिश करनी चाहिए।

इंटरव्यू के दौरान
- सबसे जरूरी है, बोर्ड द्वारा पूछे गए प्रश्नों को ध्यान से सुनना। अगर ठीक से सुन या समझ न पाए हों तो सॉरी कहकर प्रश्न दुहराने का निवेदन करें।
- उत्तर देने से पहले थोड़ा ठहरें, फिर शांति से उत्तर दें। जल्दबाजी महंगी साबित हो सकती है।
- सबसे महत्वपूर्ण पॉइंट्स पहले रखें।
- उत्तर देते वक्त ईमानदार बने रहें। उत्तर न मालूम हो तो विनम्रतापूर्वक बोर्ड से क्षमा मांग लें।
- उदार, छोटे व संतुलित उत्तर पर जोर दें।
- किसी भी विचारधारा, धर्म, पार्टी, भाषा, प्रजाति के प्रति तटस्थ रहने की कोशिश करें।
- बॉडी-लैंग्वेज का खासा ध्यान रखें। उत्तर देते वक्त आई-टु-आई कॉन्टैक्ट बनाए रखें।
- कमरे में प्रवेश करते वक्त या कमरा छोड़ते वक्त बोर्ड सदस्यों का अभिवादन या शुक्रिया करना जरूरी है।

अलग-अलग विषयों/व्यवसायों के स्टूडेंट्स का प्रदर्शन
यूपीएससी द्वारा प्री एग्जाम में सीसेट शामिल किए जाने के बाद इसमें काफी बदलाव आ चुका है। एक ताजा सर्वे में पिछले तीन साल के अंदर अंतिम रूप से चयनित कैंडिडेट में विषय/व्यवसाय, लिंग, क्षेत्र और माध्यम के छात्रों का प्रदर्शन इस तरह रहा है:
मानदंड
वर्ष
2011
2010
2009
इंजिनियरिंग
44%
35%
26%
मेडिकल
14%
10%
7%
कला
20%
26%
24%
महिला
22%
18%
28%
ग्रामीण
70%
57%
66%
अंग्रेजी माध्यम
90%
85%
82%



हिंदी के स्टूडेंट्स की समस्या
पिछले सालों में हिंदी के स्टूडेंट्स के अंतिम रूप से चयन होने का प्रतिशत काफी कम है। सीसेट के आने से और इसके पेपर में शामिल अंग्रेजी के 8-10 प्रश्नों, रीजनिंग, डिसिजन मेकिंग, गणित, सामान्य मानसिक योग्यता, कॉम्प्रिहेंशन के जटिल अनुवाद आदि ने प्री में ही हिंदी भाषी छात्रों की सफलता के प्रतिशत को काफी हद तक प्रभावित किया है। हिन्दी भाषी उम्मीदवार को तैयारी के पहले चरण की बाधा को दूर करने के लिए अपनी सीसेट पेपर की तैयारी पर खास ध्यान देना होगा।

कुछ महत्वपूर्ण वेबसाइट्स
1. www.pib.nic.in
2. www.wikipedia.org
3. www.bbc.com
4. www.prsindia.com
5. www.indiaenvironmentportal.org.in
6. www.thediplomat.com

Sunday, April 28, 2013

वापसी (कहानी)


नींद खुलते ही कुंज हडबडाकर उठा। बाहर शाम का धुंधलका फैला हुआ था। मेज पर रखी अलार्म घडी छह बजा रही थी। बादलों से भरे आकाश और सुबह से हो रही टिप-टिप बरसात के कारण शाम में ही रात का भ्रम होने लगा था। वह कमरे से निकल कर बरामदे में रखी लंबी-चौडी आरामकुर्सी पर आ बैठा। वहां रखे सारे फर्नीचर साफ-सफाई के बाद उस जगह की गरिमा को पहले सा बनाए हुए थे। बरामदा सुनसान था। मेज पर सुबह का अखबार फडफडा रहा था। उसे उलटते-पुलटते वह मुकुंद बिहारी का इंतजार करने लगा। वह इस इलाके के प्रसिद्ध प्रॉपर्टी डीलर थे। उनके बिना किसी भी बडी जायदाद को खरीदना-बेचना संभव नहीं था।
 मौसम खराब होने की वजह से ही नहीं आ पा रहे थे। तभी उसे जगा पाकर रमिया ने एक कप चाय लाकर मेज पर रख दी।
 कुछ खाने को लाऊं?
 नहीं.. बस रहने दो काकी।
 रमिया कुंज के जन्म से भी पहले से उनके घर में काम करती थी। बूढी हो गई थी, लेकिन मालिक की इकलौती निशानी से मिलने चली आई। काम में मदद के लिए छोटी बहू को भी साथ लाई थी।
 गर्जन के साथ बारिश तेज हो गई। बिजली भी चली गई। घुप अंधेरे के बीच रह-रह कर बिजली का चमकना और ठंडी हवाओं का छू जाना इस समय बहुत भला लग रहा था। थोडी ही देर में उसका मन चंचल पांखी बन सुदूर अतीत की यादों में गोते लगाने लगा, जो बरसों से दिल के किसी कोने में दफन था।
 यह गांव सच्चे अर्थो में वह बोधिवृक्ष था, जिसकी छांव में उसे ज्ञान मिला था जीवन के हर पहलू को जानने-समझने का।
 जैसे कल की ही बात हो.., जब कभी तेज हवाएं चलतीं, उसके कदम घर में नहीं ठहर पाते थे। अम्मा की डांट का डर भी नहीं रोक पाता था। हवा के संग-संग आम के बगीचे में उडता-फिरता। आम के एक-एक टिकोरे के पीछे लपकता, बच्चों के साथ मिलकर शोर मचाता और उसके पीछे भागता पुराना नौकर यमुना, जिसे अम्मा दौडाती थीं ताकि उसे घर लाया जा सके। मगर वह यमुना को भी दौडा-दौडाकर थका देता। घर आता तो अम्मा के प्रवचन शुरू हो जाते, तुम्हें शर्म नहीं आती, ऐसे गंदे बच्चों के साथ, एक-एक टिकोरे के लिए झपटते, वो भी अपने ही बगीचे में। बोलो कितने टिकोरे चाहिए? यमुना को भेज कर अभी मंगवा देती हूं।
 अम्मा को कौन समझाए कि टिकोरा चुनकर लाने में जो मजा है वह एक टोकरा पा जाने में कहां है। अपने लिए नरम भुट्टा छांटना भी उसे बहुत पसंद था। कई भुट्टों में छेद करके देखता, तब कोई नरम भुट्टा मिलता। यमुना की नजर पडती तो वह शोर मचा देता, अम्मा से शिकायतें लगाता। संकट की घडी में उसे बचाते खेत के मचान पर बैठे दीनू काका। झट से उसे मचान पर चढा कर चादर में छुपा लेते और यमुना भन्नाता हुआ पूरे खेत में उसे खोजता। कभी-कभी अम्मा को जाने कैसे पता चल जाता कि उसे छुपाने में दीनू काका का हाथ है। फिर तो उसके साथ-साथ दीनू काका के लिए भी दसियों कसीदे पढ देतीं। अम्मा की जली-कटी सुन कर भी काका शांत रह जाते, भौजी, आप भी नन्ही सी जान के पीछे पडी रहती हैं। खेलने-कूदने दीजिए। यही तो समय है उसके खेलने-कूदने का..,
 हां..हां.. क्यों नहीं? इसका खेलना-कूदना तो देख ही रही हूं। ऐसा ही हाल रहा तो यह भी मचान पर बैठ चिडिया उडाया करेगा।
 भौजी आप जितना चाहें मुझे कोसें, कुंज के लिए कुछ न कहें। एक दिन यह खानदान का नाम रोशन कर देगा।
 दीनू काका की नजरों में उसके लिए अगाध प्रेम देख कर कभी-कभी अम्मा हैरान रह जातीं। काका के नैन-नक्श तीखे थे, लेकिन एक पैर जन्म से ही मुडा था।





कोल्ड ड्रिंक पीने से पड़ सकता है दिल का दौरा!


कम कैलोरी वाले डायट साफ्ट ड्रिंक्स से फायदे से ज्यादा नुकसान हो सकता है। एक नये अध्ययन में दावा किया गया है कि इस तरह के शीतल पेय का दिन में एक बार सेवन करने से व्यक्ति में दिल के दौरे का खतरा काफी बढ़ सकता है।
मियामी मिलर स्कूल आफ मेडिसिन यूनीवर्सिटी और कोलंबिया यूनीवर्सिटी मेडिकल सेंटर के नेतत्व में एक अंतरराष्ट्रीय दल ने कहा कि उनके शोध के निष्कर्षों ने इस भावना को खारिज किया है कि ये डायट ड्रिंक्स स्वास्थ्यकर होती हैं और इनके सेवन से पतले होने में मदद मिलती है।
डेली एक्सप्रेस अखबार की खबर के अनुसार, अपने अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग प्रतिदिन डायट ड्रिंक्स पीते हैं उनमें दिल के दौरे या नाड़ी संबंधी रोग होने की आशंका 43 प्रतिशत ज्यादा होती है।
इस अध्ययन में डायट और सामान्य दोनों तरह के शीतल पेय के सेवन और दिल के दौरे तथा नाड़ी संबंधी रोगों के खतरे को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने एक खास समूह पर अध्यययन किया। निष्कर्षों में पाया गया कि जो लोग प्रतिदिन डायट ड्रिंक्स पीते हैं उनमें दिल के दौरे या नाड़ी संबंधी रोग होने की आशंका 43 प्रतिशत ज्यादा होती है।
एक महीने में एक बार से सप्ताह में छह बार हल्की डायट ड्रिंक्स पीने वालों और सामान्य शीतल पेय लेने वालों में इस तरह के रोगों के खतरे की संभावना बहुत कम होती है। इस दल का नेतृत्व करने वाले हाना गार्डनर ने कहा कि हमारे नतीजों में संकेत मिले हैं कि प्रतिदिन डायट शीतल पेय के सेवन और नाड़ी संबंधी रोगों के बीच गहरा संबंध है।








कैंसर समय से जानकारी ही बचाव


कैंसर एक घातक बीमारी तो है लेकिन जीवनशैली में थोड़ी-सी सावधानी बरती जाए तो इससे दूर भी रहा जा सकता है। अगर इसके लक्षण दिखने भी लगें तो समय रहते जरूरी उपाय करने से इसके बड़े कुप्रभाव से बच सकते हैं। 4 फरवरी को कैंसर दिवस है, तो आइए जानें कि दिल्ली की जीवनशैली में हम खुद को इससे कैसे दूर रखें।
दुनिया में कैंसर की वजह से होने वाली मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सन् 2008 में 76 लाख मौतें कैंसर की वजह से हुईं। यह संख्या कुल मौतों का लगभग 13 फीसदी थी। एक अनुमान के अनुसार सन् 2030 में यह संख्या बढ़ कर एक करोड़ दस लाख हो सकती है। चिंता की बात ये है कि कैंसर महानगरों और दिल्ली जैसी मैट्रो सिटीज में अधिक बढ़ रहा है। 4 फरवरी को कैंसर दिवस है। आइए जानें कि कैंसर क्या है, क्यों होता है, कैसे आप इसके होने के खतरों को कम कर सकते हैं, कैंसर से लडऩे के लिए क्या-क्या किया जाना चाहिए।
क्या आप जानते हैं
भारत में हर साल फेफड़े, पेट, लिवर और ब्रेस्ट कैंसर से सबसे अधिक मौतें होती हैं।
लगभग 30 फीसदी कैंसर से होने वाली मौतें के पीछे ये पांच कारण जिम्मेदार होते हैं- मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू और धूम्रपान का अधिक सेवन, एल्कोहल लेना, फल और सब्जियां काफी कम खाना या न खाना।
यह भी एक तथ्य है कि कैंसर से मरने वालों में महिलाओं का प्रतिशत अधिक है। दिल्ली में गर्भाशय कैंसर से पीडि़त महिलाएं लगभग 10.6 फीसदी है।
भारत में हर साल लगभग दस लाख लोग कैंसर से पीडि़त होते हैं। इतना ही नहीं भारत में सबसे ज्यादा महिलाओं को सर्विकल कैंसर होता है।
एक अनुमान के अनुसार अपने यहां कैंसर के 30 लाख से भी अधिक मरीज हैं।
विश्व में हर साल लगभग 15 लाख महिलाओं की मौत तंबाकू के सेवन से होती है।
भारत में करीब हर सातवें मिनट में एक महिला की मौत का कारण सर्विकल कैंसर है और लगभग एक लाख 32 हजार महिलाएं हर साल सर्विकल कैंसर से पीडि़त होती हैं, जिनमें से लगभग 74 हजार की मौत हर साल होती है।
कैंसर क्या होता है
शरीर में कोशिकाओं के समूह की अनियंत्रित वृद्घि कैंसर है। आमतौर पर कोशिकाओं के बनने-बिगडऩे के दौरान सेल्स की होने वाली अनियंत्रित वृद्घि और उनके विकास से कैंसर की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। जब ये कोशिकाएं ऊतकों (टिश्यू) को प्रभावित करती हैं तो स्वस्थ ऊतक संक्रमित होकर पूरे शरीर में फैलने लगते हैं। क्या आप जानते हैं कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है। यह गले में, मुंह में, ब्रेस्ट में और यहां तक की भ्रूण को भी कैंसर हो सकता है।
देश में कैंसर का प्रकोप दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। दरअसल कैंसर का इलाज संभव तो है, लेकिन यदि इसका समय पर पता न लगाया जाए, तो ये मौत का कारण भी बन सकता है। इसलिए डॉक्टरों की यही सलाह होती है कि शुरुआती चरणों में ही इसका पता लगा लिया जाए, तभी इसे बढऩे से रोका जा सकता है।
कारण
कैंसर का कारण कोशिकाओं का अनियंत्रित रूप से बढऩा और उनका विकास होना है। लेकिन कुछ और भी महत्वपूर्ण कारक हैं, जिनसे कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है। इनमें हैं उम्र का बढऩा, धूम्रपान और तंबाकू, शारीरिक निष्क्रियता, आनुवांशिक कारण, असंतुलित खानपान, किसी प्रकार का संक्रमण होना, खराब वातावरण आदि।
लक्षण
सामान्य से अधिक खांसी और खांसी के दौरान रक्त आना
शरीर के किसी हिस्से में रह-रहकर दर्द उठना
शरीर में कहीं गांठ का महसूस होना और सूजन आना
पेशाब या मल के दौरान रक्त आना
मीनोपॉज के बाद ब्लड आना
एनीमिया या लंबे समय तक एसीडिटी की शिकायत
शारीरिक कमजोरी या हीमोग्लोबिन में कमी
वजन अचानक बहुत बढऩा या घटना
ऐसा जख्म जो भरता नहीं
बचाव के उपाय
आहार का खास ध्यान रखें। खाने में प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स, कैल्शियम और आयरन की कमी न होने दें।
चटपटे और तले भोजन से दूर रहें।
वजन नियंत्रित करें
नियमित रूप से सैर, व्यायाम, योग करें
साफ और स्वस्थ रहें
तनाव और डिप्रेशन से बचें
पर्याप्त नींद लें
एल्कोहल और धूम्रपान से दूर रहें।
नुकसान पहुंचाने वाली इलेक्ट्रॉनिक गैजेट से बचें
अनावश्यक एक्स-रे करवाने से बचें
घर के आसपास साफ-सफाई का खास ध्यान रखें
समय पर वैक्सीन या इंजेक्शन लगवाएं
घर में किए जाने वाले छोटे-छोटे उपाय
हल्दी- औषधीय गुणों से भरपूर हल्दी के सेवन से कैंसर के होने की आशंका को कम किया जा सकता है। हल्दी को दूध में डालकर पीना बहुत फायदेमंद होता है।
टमाटर- टमाटर में लाइकोपीन नामक पदार्थ बहुत अधिक मात्र में पाया जाता है जो विभिन्न प्रकार के कैंसर को रोकने में ना सिर्फ फायदेमंद है, बल्कि इस पदार्थ से कैंसर के पनपने की आशंका बहुत हद तक खत्म हो जाती है।
ग्रीन टी- ग्रीन टी के सेवन से कैंसर के सेल्स का बनना बंद हो जाता है। 2-3 बार ग्रीन टी के सेवन से शरीर में कैंसर के सेल्स पनपने की आशंका खत्म हो जाती है।
पुदीना और तुलसी- पुदीना और तुलसी में कई तरह के कैंसर निरोधक और पाचक तत्व पाए गए हैं, जो फ्री रेडिकल को नष्ट कर सकते हैं। बबूल और गोखरू के पौधों में भी कैंसर -निरोधक एंजाइम पाए जाते हैं


समय कम हो तो शार्ट टाइम योग


व्यस्त दिनचर्या में कई बार समय निकालना भी मुश्किल हो जाता है। कुछ योग बताते हैं जिन्हें आप चलते-फिरते कर सकते हैं
आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हमारे पास दो चीजों का सबसे ज्यादा अभाव है- समय और सुकून। समय में वृद्धि करना तो संभव नहीं है, किंतु अपनी एकाग्रता में वृद्धि कर समय का बेहतर उपयोग करना हमारे वश में है। इसी प्रकार, अपनी एकाग्रता में वृद्धि कर मन को शांत कर लेना भी हमारे वश में है। यह सब योग के अभ्यास से सहज ही हो सकता है। अगर आपके पास समय नहीं है तो उठते-बैठते, चलते-फिरते, ऑफिस में काम करते हुए, मेट्रो या बस में यात्रा करते हुए भी आप योग कर सकते हैं।
आसन- योग की रिचाजिर्ग क्रिया अति प्रभावशाली है। बस, मेट्रो आदि में यात्रा करते समय यदि हम सीट पर बैठे हैं तो सिर, रीढ़ व गले को सीधा कर लीजिए। आंख खुली रखते हुए ही 5 से 10 गहरी श्वास लीजिए। तत्पश्चात् मन को सजग रखते हुए अपने दोनों पैरों को नितम्ब से लेकर अंगुलियों तक कड़ा कीजिए। अब कड़ेपन को थोड़ा बढ़ाते हुए अधिकतम स्थिति तक ले जाइए। 5 से 10 सेकेंड तक इस स्थिति में रुकिए। इसके पश्चात् अंगुलियों से नितम्ब की ओर धीरे-धीरे पैरों को ढीला कीजिए। इसके बाद यही क्रिया क्रमश: पीठ, सीना, पेट, गले तथा चेहरे के साथ कीजिए। अंत में गहरी श्वास-प्रश्वास लेकर वापस पूर्व की स्थिति में आ जाइए।
खड़े रहने की स्थिति में ताड़ासन तथा प्रति ताड़ासन क्रिया बहुत कारगर सिद्ध होती है। सीधा खड़े होकर दोनों पैरों की एडिय़ों को यथासंभव ऊपर उठाइए। 5 सेकेंड तक इस स्थिति में रुककर वापस पूर्व स्थिति में आइए। इसके पश्चात् पैर के पंजे को उठाकर एड़ी पर खड़े हो जाइए। दीवार आदि का सहारा लिया जा सकता है। इन दोनों क्रियाओं का बारी-बारी 25 से 50 बार तक अभ्यास कीजिए।
प्राणायाम- यहां बताई किसी भी स्थिति में दो प्रकार की श्वसन क्रियाएं बहुत लाभकारी सिद्ध होती हैं- पहली, यौगिक श्वसन तथा दूसरी स्टेप ब्रीदिंग क्रिया है। यौगिक श्वसन के अंतर्गत बैठे या खड़े हुए, आंखें बंद कर या खोलकर, गहरी श्वास-प्रश्वास लेते हैं। गहरी श्वास लेकर पहले पेट तथा उसके बाद सीने को यथासंभव फैलाइए। इसके बाद गहरी श्वास निकालते हुए पहले सीने तथा बाद में पेट को धीरे-धीरे पिचकाइए। यह यौगिक श्वसन का एक चक्र है। इसके चक्रों का यथासंभव अभ्यास कीजिए।
दूसरी क्रिया-स्टेप ब्रीदिंग है। इस क्रिया में हर एक श्वास तीन स्टेप्स में अंदर लेते हैं तथा तीन ही स्टेप्स में बाहर निकालते हैं। पहले स्टेप में थोड़ा श्वास अंदर लेकर एक सेकेंड रुकिए, उसके बाद द्वितीय स्टेप से थोड़ी श्वास अंदर लेकर एक सेकेंड तक रुकिए। अंत में पूरी श्वास अंदर लेकर एक सेकेंड रुकिए तत्पश्चात् तीन स्टेप्स में ही श्वास को बाहर निकालिए। यह एक चक्र है। इसके चक्रों का भी यथासंभव अभ्यास कीजिए।
सहज ध्यान- यह ध्यान बैठकर या खड़े होकर कहीं भी किया जा सकता है। यह एक विशेष प्रकार का ध्यान है जो आंख खोलकर या बंद कर किसी भी स्थिति में किया जा सकता है। इस ध्यान में व्यक्ति अपनी आस्था के अनुसार कोई मंत्र या किसी देवी-देवता का चित्र अपने मन में सोच सकता है। इसका अभ्यास मानसिक होता है। उदाहरण के रूप में हम ओम् को लेते हैं। प्रत्येक श्वास-प्रश्वास के साथ ओम् का अभ्यास अपने मन ही मन में करते जाइए। पूरी सजगता बनाए रखिए, ताकि विचारों, स्मृतियों तथा कल्पनाओं में मन अधिक न भटक पाये। इसका 5 मिनट तक अभ्यास मन को नकारात्मक एवं अनावश्यक विचारों से मुक्त कर देता है।
आहार- इन क्रियाओं का अभ्यास करने वाले व्यक्ति को अपने आहार में प्रोटीनयुक्त तथा तरल पदार्थों को अधिक से अधिक शामिल करना चाहिए। सूप, जूस, फल, दूध तथा दही सर्वोत्तम है। तले-भुने तथा गरिष्ठ भोजन के सेवन से बचना चाहिए।
लाभ- ये क्रियाएं शरीर और मन को स्फूर्ति तथा ऊर्जा देती हैं। मन की एकाग्रता शक्ति में तीव्र वृद्धि कर स्मृति, सहनशीलता, धैर्य तथा धारणा शक्ति को बढ़ाता है। भय, चिंता, क्रोध, नकारात्मक विचार तथा असुरक्षा से रक्षा करता है। यह पाचन शक्ति, रोग-प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है तथा मस्तिष्क को रचनात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत कर हमारी कार्यक्षमता तथा उत्पादकता में वृद्धि करता है।