Thursday, January 24, 2013

इनकम टैक्‍स बचाने के सात उपाय, जो सैलरी से नहीं कटने देंगे आपके हजारों रुपये

इनकम टैक्‍स बचाने के सात उपाय, जो सैलरी से नहीं कटने देंगे आपके हजारों रुपये



मेहनत करके लोग पैसा कमाते हैं लेकिन जब यही पैसा इनकम टैक्स के रूप में साल के अंत में आपकी सैलरी से काट लिया जाता है। तो यकीनन यह सबसे कष्ट देने वाला लम्हा होता है। हर कोई चाहता है कि उसका टैक्स कम से कम कटे लेकिन इसके लिए आयकरदाता पूरी तैयारी नहीं कर पाता है। आज हम इनकम टैक्स एक्सपर्ट के शब्दों में आपको वो तरीका बताएंगे जिससे सैलरी से कटने वाला इनकम टैक्स बचाया जा सकेगा। इन तरीकों को अपनाकर आप हजारों रुपये तक हर साल बचा सकते हैं।
 
जनवरी से मार्च वित्त वर्ष के वो महीने होते हैं जब टैक्स प्लानिंग चिंता का सबसे बड़ा मुद्दा होता है। ज्यादा टैक्स कटौती के दायरे में आने वाले वेतनभोगी आखिरी समय में निवेश के ऐसे विकल्प खोजते हैं जहां वे टैक्स बचा सकें। लेकिन समझदारी इसी में है कि विभिन्न इन्स्ट्रूमेंट्स की विशेषताओं और फायदों पर नजर डाल ली जाए।सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर और और द फाइनेंशियल प्लानर्स गिल्ड इंडिया के सदस्य जितेंद्र पी.एस. सोलंकी बता रहे हैं कि टैक्स प्लानिंग के लिए कैसे समझदारी से निवेश करें:  
 
 
1. जीवन बीमा : इसमें आप हर साल प्रीमियम जमा करते हुए टैक्स सेविंग कर सकते हैं। टैक्स बेनिफिट के एक अप्रैल 2012 से हुए बदलाव के अनुसार यदि बेस कवरेज प्रीमियम के 10 गुना से कम है तो टैक्स सेविंग का लाभ नहीं मिल पाएगा। यह शर्त पॉलिसी की पूरी अवधि तक लागू रहती है। टैक्स सेविंग के लिहाज से इसे लेने का फैसला जल्दबाजी में न करें। 
 
2. ईएलएसएस : इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम भी अच्छे रिटर्न के साथ टैक्स सेविंग का पसंदीदा माध्यम रहा है। इसका मुख्य कारण तीन साल का लॉक-इन पीरियड और निवेश का सरल तरीका है। हालांकि बीते कुछ वर्षों के दौरान शेयर बाजार की अस्थिरता से इसका आकर्षण घटा है। लेकिन बाजार को समझने वालों के लिए अभी भी टैक्स सेविंग के लिए अच्छा इन्स्ट्रूमेंट है। 
 
3. स्मॉल सेविंग्स : पब्लिक प्रोविडेंट फंड लंबी अवधि की प्लानिंग के लिहाज से अच्छा निवेश है। इसमें निवेश की रकम, ब्याज और मैच्योरिटी पर टैक्स नहीं लगता है। हालांकि एक दिसंबर 2011 से इसकी ब्याज दरें बाजार से जोड़ दी गई हैं। फिर भी टैक्स सेविंग के लिए यह अच्छा विकल्प है। एनएससी या डाकघर जमा जैसी अन्य स्मॉल सेविंग स्कीम में निवेश करना आसान है। लेकिन इन पर मिलने वाले ब्याज पर कर लगता है। इसलिए सभी निवेशकों के लिए यह फायदेमंद नहीं होती। 
 
4. एनपीएस : न्यू पेंशन स्कीम अब सबके लिए उपलब्ध है। ऐसे निवेशक जो रिटायरमेंट प्लानिंग के लिहाज से निवेश का एलोकेशन नहीं कर पाते उनके लिए यह अच्छा विकल्प है। नियोक्ता के कॉन्ट्रिब्यूशन से एडिशनल टैक्स बेनिफिट इसे आकर्षक बनाता है। 
 
5. फिक्स्ड डिपॉजिट : टैक्स बचाने के लिहाज से एफडी सबसे आसान विकल्प है। लेकिन इनका ब्याज टैक्स फ्री नहीं है। यह विकल्प उनके लिए ठीक है जो लोअर टैक्स ब्रैकेट में आते हैं। 
 
6. हेल्थ इंश्योरेंस: यह 80सी से ज्यादा टैक्स बेनेफिट देता है। व्यक्ति को पहले अपनी जरूरत को समझकर इसे लेना चाहिए। इसमें टैक्स बेनिफिट एक एडेड एडवांटेज है। 
 
7. आरजीईएसएस : राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम टैक्स लाभ का नया विकल्प है। यह उनके लिए है जिन्होंने शेयर बाजार में कभी निवेश नहीं किया है। इसके तहत 50 हजार रुपए तक की सीमा में जितना भी निवेश करते हैं उसके 50 फीसदी के बराबर अपनी आय में टैक्स बेनेफिट ले सकते हैं। लेकिन इक्विटी स्कीम होने से जोखिम भी जुड़ा होता है। 
 
टैक्स प्लानिंग आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग का एक हिस्सा है। इसके उपाय वित्त वर्ष के शुरू में ही कर लेने चाहिए। इससे आखिरी महीनों में आप पर वित्तीय दबाव नहीं पड़ेगा और भागदौड़ से भी बचेंगे। 



इनकम टैक्‍स बचाने के सात उपाय, जो सैलरी से नहीं कटने देंगे आपके हजारों रुपये


निवेश सलाहकारों के मानक हुए और कड़े 
 
 
सेबी के पास कराना होगा पंजीकरण 
 
हर उत्पाद की फीस का होगा खुलासा 
 
सलाह के खिलाफ राय 15 दिन तक नहीं 
 
उत्पादों में होल्डिंग का खुलासा जरूरी 
 
सारे रिकॉर्ड रखने होंगे 5 साल तक 
 
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पूंजी बाजार नियामक सिक्युरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड (सेबी) ने निवेश सलाहकारों के मानकों को और कड़ा कर दिया है। अब सभी निवेश सलाहकारों को बाध्यकारी रूप से सेबी के पास पंजीकरण कराना होगा। इस मामले में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सेबी ने बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) व कॉरपोरेट्स से कहा है कि वे निवेश सलाहकारी सेवाओं को अपनी अन्य गतिविधियों से अलग करें। साथ ही, निवेश सलाहकारों को हर प्रोडक्ट पर वसूल की जाने वाली फीस को स्पष्ट करना होगा। सेबी के यह मानक तीन माह में लागू हो जाएंगे। 
 
सोमवार को जारी इस आशय की अधिसूचना में सेबी ने कहा है कि वित्तीय उत्पादों के बारे में सलाहकारी सेवाएं देने वाली सभी संस्थाओं को अब इसके पास बाध्यकारी रूप से पंजीकरण कराना होगा। साथ ही, इन्हें सलाहकारी सेवाओं को वितरण जैसी अन्य गतिविधियों से अलग करना होगा। निवेश सलाहकार बनने के लिए किसी कॉरपोरेट संगठन की न्यूनतम वैल्यू 25 लाख रुपये की होनी चाहिए। व्यक्तिगत निवेश सलाहकारों के मामले में यह वैल्यू एक लाख रुपये रखी गई है। सेबी ने सभी मौजूदा निवेश सलाहकारों को इन पूंजीगत मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक साल का समय दिया है। 
 
निवेश सलाहकारों के काम को ज्यादा जवाबदेह बनाने के लिए सेबी ने कहा है कि अगर किसी ग्राहक को कोई सलाह दी जाती है तो निवेश सलाहकार इसके बाद कम से कम 15 दिनों तक इसके ठीक विपरीत सलाह नहीं दे सकेगा। साथ ही, निवेश सलाहकारों को उत्पाद विशेष पर ली जाने वाली फीस, उत्पादों में खुद की होल्डिंग, निवेश को लेकर जोखिम और वित्तीय उत्पाद जारी करने वाली संस्था के साथ अपने संबंध के बारे में स्पष्ट खुलासा करना होगा। साथ ही निवेश सलाहकारों को पांच साल तक ग्राहकों की केवाईसी, एग्रीमेंट की कॉपी, निवेश को लेकर दी गई सलाह, फीस का डाटा और सलाह दिए जाने के समय का रिकॉर्ड भौतिक या इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखना होगा। 
 
सेबी ने निवेश सलाहकारों के लिए प्रमाणपत्र लेने को बाध्यकारी बना दिया है। मौजूदा समय में निवेश सलाहकार का काम कर रही संस्थाओं को छह माह के भीतर यह प्रमाणपत्र सेबी से लेना होगा।प्रमाणपत्र पांच साल के लिए दिया जाएगा और एक्सपायर होने से तीन माह पहले इसका नवीनीकरण कराना होगा। निवेश सलाहकारों के पार्टनरों व उनके साथ काम करने वाले प्रतिनिधियों को भी दो साल के भीतर प्रमाणपत्र हासिल करना होगा। सेबी ने इनके लिए कुछ शैक्षणिक योग्यताएं भी तय की हैं। हालांकि, सेबी ने किसी के भले के लिए सलाह देने वालों, वकीलों व बीमा एजेंटों को इस दायरे से बाहर रखा है।



इनकम टैक्‍स बचाने के सात उपाय, जो सैलरी से नहीं कटने देंगे आपके हजारों रुपये



भारतीय सीईओ पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा कॉन्फिडेंट 
 
पीडब्ल्यूसी सर्वे के निष्कर्ष 
 
विदेशी कंपनियों के सीईओ का विश्वास बढऩे के बजाय अब और घट गया है 
 
अपनी कंपनियों में नई भर्तियों को लेकर भी भारतीय कंपनियों के सीईओ काफी आश्वस्त 
 
पिछले साल भारत में ही सबसे कम कंपनियों ने कर्मचारियों की छंटनी की थी
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भारतीय कंपनियों के सीईओ के कॉन्फिडेंस का कोई जवाब नहीं है। दरअसल, अपने बिजनेस में ज्यादा कमाई और ग्लोबल आर्थिक परिदृश्य में सुधार को लेकर पूरी दुनिया में भारतीय कंपनियों के सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) ही सबसे ज्यादा आश्वस्त हैं। वहीं, दूसरी ओर अन्य सभी देशों की कंपनियों के सीईओ इस साल ग्लोबल अर्थव्यवस्था में सुधार होने और आने वाले समय में बेहतर कारोबारी कमाई को लेकर कुछ खास आश्वस्त नहीं हैं। 
 
कटु सच्चाई तो यह है कि विदेशी कंपनियों के सीईओ का विश्वास बढऩे के बजाय अब और घट गया है। जानी-मानी कंसल्टेंसी फर्म पीडब्ल्यूसी द्वारा द्वारा कराए गए सालाना ग्लोबल सीईओ सर्वेक्षण से ये तथ्य उभर कर सामने आए हैं। यहां आयोजित वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की सालाना बैठक के मौके पर मंगलवार की रात पीडब्ल्यूसी ने अपनी रिपोर्ट जारी की। सर्वे में बताया गया है कि अपनी-अपनी कंपनियों में नई भर्तियों को लेकर भी भारतीय कंपनियों के सीईओ काफी ज्यादा कॉन्फिडेंट हैं। बात अगर पिछले साल की करें तो उस दौरान भारत में ही सबसे कम कंपनियों में कर्मचारियों की छंटनी की गई। डब्ल्यूईएफ की शिखर वार्ता के दौरान अपने 16वें सालाना सीईओ सर्वेक्षण के निष्कर्षों का जिक्र करते हुए पीडब्ल्यूसी ने यह भी बताया, ‘ग्लोबल स्तर पर महज 36 फीसदी सीईओ ने कहा कि वर्ष 2013 में अपनी-अपनी कंपनियों में विकास की अच्छी संभावनाओं को लेकर वे काफी ज्यादा आश्वस्त हैं।’ दरअसल, वर्ष 2012 में 40 फीसदी सीईओ और वर्ष 2011 में इससे भी अधिक 48 फीसदी सीईओ ने ठीक यही बात कही थी। 


इनकम टैक्‍स बचाने के सात उपाय, जो सैलरी से नहीं कटने देंगे आपके हजारों रुपये



आर्थिक मामलों के जानकार अरविंद कुमार सेन बता रहे हैं कि सोने पर लिया गया ताजा फैसला बीमारी को खत्म करने की बजाए, उसके लक्षणों को दूर करने के सरकारी ट्रेंड की एक और मिसाल है। सोने की मांग कम करने की गरज से इस पर लगने वाला आयात शुल्क चार से बढ़ाकर छह फीसदी कर दिया गया है और गोल्ड लोन देने वाली एनबीएफसी से कहा गया है कि गिरवी रखे जाने वाले आभूषणों की कीमत का अधिकतम 60 फीसदी लोन ही दिया जा सकता है। एनबीएफसी (नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कोरपोरेशन) ऐसे वित्तीय संस्थान को कहा जाता है जो कर्ज मुहैया करवाते हैं लेकिन जनता से जमाएं स्वीकार नहीं कर सकते हैं। सोने के आयात शुल्क में इजाफा करना एक ऐसी दवा है जिसकी घुट्टी सरकार कई मर्तबा पिला चुकी है लेकिन इसका असर एक बार भी देखने को नहीं मिला है। बीते साल बजट में तब के वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने सोने पर लगने वाला आयात शुल्क दो फीसदी से बढ़ाकर चार फीसदी कर दिया था, मगर सोने के आयात में कहां कमी हुई? अब मौजूदा वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने उसी पुरानी दवा की खुराक दी है लेकिन इस बार दवा मरीज को रिएक्शन करने जा रही है। 
 
सोने पर आयात शुल्क बढ़ाना इस मर्ज की दवा नहीं है और 1990 के दशक में भारत इसके दुष्परिणाम भुगत चुका है। सोने की मांग में तेजी की असली वजहों को दूर किए बगैर इसके आयात को महंगा करने से अंडरग्राउंड कारोबार को हवा मिलेगी। 30 लाख रुपए प्रति किलो से ऊपर बिक रही इस धातु की मांग को पूरा करने के लिए तस्कर नेपाल और दुबई के रास्ते टैक्स रहित सोना भारत भेजना शुरू कर देंगे। जैसा कि 1990 में हो चुका है, अवैध तरीके से किए जाने वाले सोने के इस व्यापार से अर्थव्यवस्था को दोहरा नुकसान होगा। सोने की खपत में भी कमी नहीं आएगी और सरकार सोने पर मिलने वाले टैक्स से भी वंचित रह जाएगी। सवाल उठता है कि आखिर रास्ता क्या है और सरकार क्यों सोने का आयात कम करना चाहती है। दरअसल, सोना ही वह एकमात्र चीज है जिसने पिछले कुछ समय में देश के भुगतान संतुलन को सबसे ज्यादा तहस-नहस किया है। 2008-09 में आर्थिक मंदी के बाद से सोने का आयात बिल 21 अरब डॉलर से बढ़कर 2011-12 में 56 अरब डॉलर का दायरा पार कर चुका है। देश के चालू खाते का घाटा (आयात और निर्यात भुगतान के बीच का फर्क) मौजूदा वित्तवर्ष की आखिरी तिमाही में जीडीपी का 5.4 फीसदी हो गया है और इस इजाफे में 70 फीसदी योगदान सोने का है। जब आयात बिल निर्यात से ज्यादा हो तो चालू खाते को घाटा पैदा होता है और 5.4 फीसदी का आंकड़ा किसी भी लिहाज से अर्थव्यवस्था के लिए कंफर्ट जोन नहीं कहा जा सकता है। 
 
तेल का आयात कम नहीं किया जा सकता है, लिहाजा सोने के आयात में कमी करने के अलावा दूसरी कोई राह नहीं है। सोने में लोगों की इस कदर दिलचस्पी की दो बड़ी वजहें हैं। पहली, डबल डिजीट मुद्रास्फीति के वक्त में शेयर मार्केट, म्युचूअल फंड, बैंक और पोस्ट ऑफिस जमा योजनाएं लोगों को पॉजिटिव रिटर्न देने में नाकाम रही हैं। पिछले पांच साल के दरम्यान सोने की कीमतों में सालाना 25 फीसदी की दर से इजाफा हुआ है और इस रफ्तार ने मुद्रास्फीति में हो रही सालाना सात फीसदी की बढ़त को बहुत पीछे छोड़ दिया है। सोने पर मिलने वाले रिटर्न की इस दर के सामने दूसरी सारी फाइनेंशियल एस्सेट्स फीकी पड़ गई हैं। 2009-10 से घरेलू बचत दर में लगातार आ रही कमी इस बात की तरफ इशारा कर रही है। सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में देखने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है। सोने की मांग बढऩे की दूसरी वजह यह है कि 2008 की आर्थिक मंदी के बाद से मची हलचल के कारण दुनियाभर में केंद्रीय विनियामक बैंक अपने रिजर्व को डॉलर या यूरो में रखने की बजाए सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं। चीन और ब्राजील जैसी बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाएं अपने रिजर्व का बड़ा हिस्सा सोने में रख रही हैं। ऐसे माहौल में वैश्विक स्तर पर 2008 के बाद से ही सोने की कीमतों में उछाल आ रहा है और इससे सोने का आयात बढ़ता जा रहा है। मांग में यह तेजी लोगों की इस धारणा को पुख्ता कर रही है महंगाई के खिलाफ हैजिंग (जोखिम से प्रतिरक्षा) का सबसे बड़ा हथियार सोना है और इससे मिलने वाले रिटर्न का मुकाबला इक्विटी या बैंक डिपॉजिट नहीं कर सकते हैं। 
 
सोने की मांग में इजाफा करने वाले इन दोनों कारणों को देखा जाए तो आयात शुल्क बढ़ाने की ताजा सरकारी कवायद से नुकसान के सिवाए कुछ नहीं मिलने वाला है। चूंकि लोगों ने सोने को निवेश का जरिया बना लिया है, इसलिए सोने की मांग में कमी लाने के लिए सरकार को निवेश के दूसरे विकल्प आकर्षक बनाने होंगे। अगर सरकार चाहती है कि लोग सोने से हटकर अपना पैसा बैंक और शेयर मार्केट में लगाएं तो इसकी वाजिब वजह उपलब्ध करानी होगी। मसलन फिलहाल बैंक डिपॉजिट पर मिलने वाली आय पर भी टैक्स लगाया जाता है, वहीं पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट तो पहले ही समय से पीछे छूट चुकी हैं। सोने का आयात कम करने के लिए बैंक डिपॉजिट पर लगने वाले टैक्स को हटाने के साथ ही बचत खाते पर मिलने वाली नाममात्र की ब्याज दरों में भी इजाफा करना होगा। हालांकि यह कड़वी सच्चाई है कि लंबे समय में मुद्रास्फीति को काबू किए बगैर सोने का आयात कम नहीं किया जा सकता है। गोल्ड लोन देने वाली एनबीएफसी पर चाबुक चलाने का फैसला भी उल्टा असर करेगा। एनबीएफसी से निराश ग्राहक सीधा सूदखोरों के पास जाएगा और ऐसे में पूरी आबादी को संस्थागत बैंकिंग के दायरे में लाने का मकसद ही नाकाम हो जाएगा। वक्त का तकाजा है कि सरकार बुखार की बजाए उसकी वजह का इलाज करे।  


(साभार)

Wednesday, January 23, 2013

घर बैठे आमदनी का आसान जरिया


अगर आप भी अपने पीसी या लैपटॉप के सामने बैठकर और इंटरनेट से जुड़कर कुछ बेहतर कमाना चाहते हैं। साथ ही ऑफिस जाने और बॉस के टेंशन से भी बचने की इच्छा है तो ऑनलाइन आमदनी के बारे में सोचना शुरू कर दें। बाकी बातें हम आपको बता रहे हैं।

वैसे तो आजकल ऑनलाइन अर्निंग के विज्ञापनों की भरमार रहती है। पर इनमें सभी पर यकीन नहीं किया जा सकता है। कुछ चीजें ध्यान में रखकर इस काम को आप शुरू कर सकते हैं। इसके लिए न तो आपको कोई ऑफिस स्पेस किराए पर लेने की जरूरत है और न ही आपका कोई बॉस होगा। बस ध्यान रखनी होगी डेट लाइन और ऐक्यूरेसी की। अब सोचने वाली बात यह है कि इस तरह का विकल्प अगर आपके पास आ जाए तो कौन इसे अपनाना नहीं चाहेगा। पर इसके लिए कुछ छोटी लेकिन अहम बातों पर गौर करने की जरूरत है।

बीते सालों के रिसेशन ने जहां तमाम यूरोप और अमेरिका के विकसित राष्ट्रों को छुआ, वहीं भारत ने उस दौरान भी अपना ग्रोथ रेट बरकरार रखा। वजह रही भारतीय बाजार का बड़ा होना। जिसमें कंज्यूमर की संख्या अथाह है। भारत की दूसरी खासियत है यहां का लेबर कॉस्ट कम होना। इसलिए इन्वेस्टमेंट के बाद यहां पर प्रॉफिट ही प्रॉफिट है। यही वजह है कि हर साल यहां मल्टिनैशनल कंपनियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। जो कंपनियां यहां नहीं आ पाती, वे इंडिया से आउटसोर्सिंग करती हैं। आपके ऑनलाइन अर्निंग की शुरुआत यहीं से होती है। यानी घर बैठे कमाई।

अहम बातें
1. आपका सबसे पहला काम सबसे पहले उन वेबसाइट्स की लिस्ट बनाना है, जहां आप फ्रीलांसिंग करना चाहते हैं। आज इंटरनेट पर ऐसे अनेकों साइट्स उपलब्ध हैं। इसके बाद ये वेबसाइट्स किस तरह का फ्रीलांस वर्क कराते हैं, यह भी जानकारी जुटाएं।

2. इसके बाद बारी आती है पेमेंट की। वेबसाइट्स की पेमेंट के लिए शर्तें क्या हैं। यह जानना आपके लिए जरूरी है। क्योंकि काम के साथ आमदनी के बारे में जानना भी जरूरी है।

3. आप इस बात को अवश्य स्पष्ट कर लें कि वेबसाइट किस मोड से आपको पेमेंट देगी। ज्यादातर फंड ट्रांसफर के द्वारा ही पेमेंट देते हैं।

4. आप खुद को जिस तरह के काम में सहज महसूस करते हैं, उसे ही स्वीकार करें। मान लें कि आप एक अच्छे ट्रांसलेटर हैं, तो आप ट्रांसलेशन का काम ही पकड़ें।

5. वेबसाइट पर काम शुरू करते समय चार-पांच वेबसाइट्स से जुड़ने की कोशिश करें। इससे आपको ऑफर किए जाने वाले पैसे के बारे में भी जानकारी मिलती रहेगी कि कौन अधिक दे रहा है और कौन कम।

आपके पास क्या हो?
सबसे पहले जरूरी है आपके पास कंप्यूटर, टाइपिंग और इंटरनेट की बेसिक जानकारी। वैसे इस तरह के काम के लिए किसी बड़ी डिग्री की आवश्यकता नहीं है। साथ ही आपके पास अपना कंप्यूटर या लैटटॉप भी होना चाहिए। आज इंटरनेट कनेक्शन कॉमन हो गया है। नहीं है, तो साइबर कैफे से भी काम कर सकते हैं। अगर किसी सॉफ्टवेयर की जरूरत होगी तो वह आपको जॉब प्रवॉइडर देगा।

ऐक्यूरेसी से ही होगी आमदनी
काम देते समय हर कंपनी आपके सामने कुछ शर्तें रखती हैं। सुनने में भले ही ये शर्तें आसान लगती हों पर अमल करना कठिन होता है। सामान्यतया दो फीसदी गलती होने तक आपके पैसे नहीं काटे जाते। यानी आपको 98 फीसदी काम सही करके देना होता है। इससे कम ऐक्यूरेसी होने से आपके पैसे कटने लगते हैं। 90 फीसदी से कम एक्यूरेसी होने से कई कंपनियां मैटर ही स्वीकार नहीं करती। वैसे कुछ कंपनी आपको 100 फीसदी एक्यूरेसी देने के लिए कह सकती है। दूसरी बात डेट लाइन की। कंपनी ने आपको अगर 15 दिनों का टाइम लिमिट दिया है तो काम पूरा करके इन्हीं 15 दिनों में सबमिट करना होगा। यदि आप दिए गए समय में पूरा काम करके नहीं देते हैं तो आपका काम ही स्वीकार नहीं किया जाएगा। पैसे मिलने की बात तो दूर है।

आपको देशों से भी काम मिल सकता है। मसलन, पीडीएफ फाइलों में यूरोप, अमेरिका, इंग्लैंड आदि शहरों के लाइब्रेरी की किताबों का काम होता है। यह पूरा काम इंग्लिश में होता है। इसमें गणित, साइंस, अंग्रेजी और उपन्यास की पुस्तकें होती हैं। ऐसे में आपकी अंग्रेजी भी अच्छी होनी चाहिए। अमूमन जो कंपनी आपसे काम करवाती है वह आपके साथ स्टैंप पेपर पर ऐग्रिमेंट करती है। ऐसे में अगर आपको कंपनी की सभी शर्तें मंजूर हैं तो फटाफट रजिस्ट्रेशन करवा लें।

कुछ अहम ऑनलाइन अर्निंग साइट्स
http://www.freelancer.com/
http://www.infolinks.com/
http://www.vibrantmedia.com/

(साभार)

गूगल का हर रोज करते हैं इस्तेमाल, क्या पता है ये Tricks

PICS: गूगल का हर रोज करते हैं इस्तेमाल, क्या पता है ये Tricks


आज के तकनीकी दौर में इंटरनेट की दुनिया लगातार बढ़ती जा रही है। इस विशाल दुनिया में अब लगभग हर कोई किसी ने किसी तरीके से इंटरनेट से जुड़ा हुआ है। अलग-अलग कारणों के लिए वह इंटरनेट का इस्तेमाल करता है फिर चाहे वो ईमेल के लिए हो, चैटिंग के लिए हो या फिर गूगल सर्च के लिए। इन सबके बीच गूगल को लेकर अब भी ऐसी कई ट्रिक हैं जो इंटरनेट का चसका लग चुके लोगों द्वारा दिन भर में कई घंटे गूगल का इस्तेमाल करनके के बाद भी यूजर्स को नहीं पता है।


दिलचस्प है कि इंटरनेट के दौर में गूगल सर्च करने वालों की संख्या भी काफी ज्यादा है। दिन-ब-दिन इस संख्या में लगातार इजाफा ही हो रहा है। आज के दौर में गूगल सर्च को ई-प्लेटफॉर्म पर ज्ञान के सागर तक पहुंचने का जरिया माना जाता है। हालांकि, ज्ञान के जरिए के साथ-साथ गूगल सर्च की कई ट्रिक आपको कूल और फन करने का मौका देता है। 

पेश है गूगल सर्च के प्लेटफार्म पर यूजर्स के लिए 10 कूल ट्रिक के तरीके, जिन्हें यहां समझकर आप खुद करके देखें-

नोट- ट्रिक से जुड़े सभी कीवर्ड गूगल सर्च बॉक्स में केवल अंग्रेजी में ही लिखें। हिंदी में लिखने पर ट्रिक काम नहीं करेगी।







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गूगल ग्रेविटी गूगल ग्रेविटी के लिए सबसे पहले गूगल डॉट कॉम खोलें। उसके बाद सर्च बॉक्स में गूगल ग्रेविटी लिखें। फिर उसके जस्ट नीचे सर्च के बगल में लिखे आई एम फीलिंग लक्की बटन पर क्लिक करें। बस उसके बाद आप गूगल पर ग्रेविटी इफेक्ट का मजा लीजिए। इसमें गूगल होमपेज के कंटेट ऊपर-नीचे होते दिखेंगे।

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इपिक गूगल इपिक गूगल के लिए सबसे पहले गूगल डॉट कॉम खोलें। उसके बाद सर्च बॉक्स में इपिक गूगल लिखें। फिर उसके जस्ट नीचे सर्च के बगल में लिखे आई एम फीलिंग लक्की बटन पर क्लिक करें। बस उसके बाद आप इपिक गूगल का मजा ले सकेंगे। इसमें होमपेज पर दिखने वाली हर चीज अपने आप बड़ी होती जाएगी।


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नंबर ऑफ हॉर्नस ऑन द यूनिकॉर्न सबसे पहले गूगल डॉट कॉम खोलें। उसके बाद सर्च बॉक्स में नंबर ऑफ हॉर्नस ऑन द यूनिकॉर्न लिखें। फिर उसके जस्ट नीचे दिए गए सर्च बटन पर क्लिक करें। बस उसके बाद आप नंबर ऑफ हॉर्नस ऑन द यूनिकॉर्न ट्रिक का मजा ले सकेंगे।



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चक नॉरिस सबसे पहले गूगल डॉट कॉम खोलें। उसके बाद सर्च बॉक्स में फाइंङ चक नॉरिस लिखें। फिर उसके जस्ट नीचे सर्च के बगल में लिखे आई एम फीलिंग लक्की बटन पर क्लिक करें। बस उसके बाद आप चक नॉरिस ट्रिक का मजा ले सकेंगे। नोट- ट्रिक से जुड़े सभी कीवर्ड गूगल सर्च बॉक्स में केवल अंग्रेजी में ही लिखें। हिंदी में लिखने पर ट्रिक काम नहीं करेगी।

(साभार)


6 उपाय पुरुष करके देखें हर तरह की कमजोरी दूर हो जाएगी


PHOTOS:6 उपाय पुरुष करके देखें हर तरह की कमजोरी दूर हो जाएगी

असंयमित खान-पान या शरीर में पोषक तत्वों के कारण या अन्य गलत आदतों से कई बार पुरुषों को दुर्बलता या कमजोरी की परेशानी होने लगती है।क्या आप दुर्बलता या कमजोरी से परेशान हैं?आपका वैवाहिक जीवन खुशहाल नहीं है।सारी दवाओं और तेल का उपयोग करने के बाद भी कोई असर नहीं हो रहा है तो चिंता न करें पुरुषों की इस कमजोरी और परेशानी को दूर करने के लिए आयुर्वेद में कई उपाय बताए गए हैं। उनमें से 6 उपाय इस प्रकार हैं-

PHOTOS:6 उपाय पुरुष करके देखें हर तरह की कमजोरी दूर हो जाएगी


 - आंवला विटामिन सी का जबरदस्त भंडार है। साथ ही कई पौष्टिक तत्वों से लबालब भी है।अकेले आंवले में जितना विटामिन सी होता है दूसरे किसी फल में अब तक नहीं पाया गया है।एक सौ ग्राम ताजे हरे आंवले में आठ सौ मिलीग्राम विटामिन सी होता है। जिन लोगों को अत्यधिक स्वप्नदोष होने की समस्या है वे प्रतिदिन आंवले का मुरब्बा खाएं।


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- केला पुरुष की शक्ति बढ़ाने वाला फल है।केला खाने से पुरूषों में स्पर्म की मात्रा बढ़ जाती है, जो उनके अंदर सेक्स पावर को भी बढ़ाता है। साथ ही केले खाने से स्त्रियों को मासिक धर्म के समय परेशानी का कम सामना करना पड़ता है।प्रतिदिन केले खाएं एवं संभव हो तो केले खाने के बाद दूध भी पीएं।


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-अनार खाने से शरीर में शक्ति और विशेष प्रकार की ऊर्जा उत्पन्न होती है। इसके पेड़ों की पत्तियों व छाल का उपयोग भी औषधि के रूप में किया जाता है।सदियों से माना जा रहा है कि यह फल सैकड़ों बीमारियों में फायदा पहुंचाता है। अनार हृदय रोगों, तनाव और यौन जीवन के लिए बेहतर माना जाता है। कमजोरी या स्वप्नदोष की समस्या हो तो अनार के छिलको सूखा लें और पीस लें। इसके बाद प्रतिदिन सुबह और शाम एक चम्मच इस चूर्ण को खाएं।



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- आंवले के चूर्ण में मिश्री पीसकर मिलाएं। इसके बाद प्रतिदिन रात को सोने से पहले करीब एक चम्मचइस मिश्रित चूर्ण का सेवन करें। इसके बाद थोड़ा सा पानी पीएं।



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-आंवला बेहद गुणकारी है। इसलिए इसे हर मर्ज की दवा भी कहा जाता है। आंवला पाचन तंत्र से लेकर स्मरण शक्ति   तक को दुरुस्त करता है। नियमित रूप से आंवले का सेवन करने से बुढ़ापा भी दूर रहता है। कमजोरी की समस्या में  आंवला बहुत फायदेमंद होता है। अत: प्रतिदिन रात्रि में गिलास में थोड़ा सा हुआ सुखा आंवले का चूर्ण लें और उसमें पानी भर दें। सुबह उठने के बाद इस पानी में हल्दी मिलाएं एवं छानकर पीएं।


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- लहसुन में एलियम नामक एंटीबायोटिक होता है जो बहुत से रोगों के बचाव में लाभप्रद है। नियमित लहसुन खाने से ब्लडप्रेशर कम या ज्यादा होने की बीमारी नहीं होती। गैस्टिक ट्रबल और एसिडिटी की शिकायत में इसका प्रयोग बहुत ही लाभदायक होता है।कमजोरी की समस्या में पुरुषों को रोजाना रात को लहसुन की दो कलियां रात को सोने से पहले निगल कर थोड़ा पानी पी लेना चाहिए।

(साभार)

Monday, December 17, 2012

Mujhe Tum Yaad Aate Ho


Muqaddar Ke Sitaron Par
Zamano Ke Aasaron Par
Udaasi Ke Kinaron Par
Kabhi Veeran Sheron Mein
Kabhi Sunsaan Rahon Par
Kabhi Hairan Aankhon Mein
Kabhi Bejaan Lamhon Par
Tumhari Yaad Chupke Se
Koi Sargoshi Karti Hai
Ya Phir Palkein Bheeg Jaati Hai
Toh Aansoo Toot Ke Girte Hai
Hum Palkon Ko Jhukate Hai
Bazahir Muskurate Hai
Faqat Itna Hi Kehte Hai
Mujhe Tum Yaad Aate Ho