Monday, April 22, 2013
त्वचा रहेगी हर उम्र में जवां
स्वस्थ और दमकती त्वचा हर उम्र में सभी की चाहत होती है। आपकी त्वचा का रंग चाहे जैसा हो या आप किसी भी उम्र की हों, कुछ सामान्य समस्या जैसे पिग्मेन्टेशन, गहरे धब्बे, एक्ने और सनबर्न आदि आपको अपना शिकार बना सकती हैं।
महिलाएं अमूमन तनाव में रहती हैं, जिसका असर असमय उनकी त्वचा पर दिखने लगता है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रश्मि साहू के मुताबिक अगर महिलाएं तनाव से दूरी बनाकर चलने का गुर सीख लें तो वे अपनी उम्र की किसी भी दहलीज पर जवां ही रहेगी। दूसरी ओर पीरियड्स के दौरान त्वचा से अत्यधिक तेल का स्रव होता है और त्वचा तैलीय हो जाती है। कभी-कभी कुछ महिलाओं की त्वचा बहुत ढीली भी हो जाती है। जरूरी है कि आप अपने भोजन के साथ विटामिन सी और विटामिन ए की गोलियां भी लें, ताकि आपकी त्वचा को अतिरिक्त पोषण मिले। ब्यूटी एक्सपर्ट भारती तनेजा के मुताबिक कुछ बातों को ध्यान में रखकर त्वचा हर उम्र में जवां रह सकती है:
बीस से कम उम्र में
त्वचा में तेल की मात्रा को संतुलित करने के लिए प्रोटीनयुक्त चीजें जैसे दूध, दही, पनीर, दालें, अंकुरित अनाज आदि का सेवन करें और नमी को बरकरार रखने के लिए दिन में 10-12 गिलास पानी जरूर पिएं। धूप में निकलते वक्त सन्स्क्रीन लोशन का प्रयोग अवश्य करें।
बीस वर्ष की उम्र में
हमेशा सोने से पहले क्लींजिंग मिल्क से चेहरा साफ करें और फिर अच्छी क्वॉलिटी का टोनर लगाएं। इसके बाद मॉइस्चराइजर से चेहरे व गर्दन की 2-3 मिनट तक मसाज जरूर करें। किसी अच्छे कॉस्मेटिक क्लीनिक में जाकर आप अपनी त्वचा की प्रकृति के अनुरूप फेशियल भी करवा सकती हैं।
तीस की उम्र में
हर तरह के तनाव को खुद से दूर रखें। बेहतर होगा कि इस समय तक आप एंटी-एजिंग क्रीम का इस्तेमाल शुरू कर दें। आज की इस बदलती जीवनशैली में यह जरूरी हो गया है कि बढ़ती उम्र के लक्षणों पर समय रहते ही लगाम लगा दिया जाए। यदि आपको इसकी जरूरत इस उम्र से पहले ही महसूस होती है तो आप किसी एक्सपर्ट से सलाह लेकर इसका इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके अलावा चेहरे पर नियमित रूप से विटामिन ई युक्त क्रीम की मसाज भी काफी लाभदायक रहती है।
जब हो जाएं चालीस की
यह उम्र की एक ऐसी दहलीज है, जहां महिलाएं प्राय: बच्चों को जन्म देने की प्रक्रिया से मुक्त हो जाती हैं। अत: इस दौरान शरीर के हार्मोन स्थिर होते हैं। आप चाहें तो किसी ब्यूटी क्लीनिक में जाकर चेहरे के काले निशान हटवा सकती हैं। इसके अलावा जरूरी है कि 35 की उम्र के बाद एएचए फेशियल करवाएं और कोलाजन मास्क भी लगवाएं, इस मास्क से त्वचा के भीतर कोलाजन बनना शुरू हो जाता है।
पचास की उम्र में फिर से पाएं चमक
मेनोपॉज के बाद त्वचा पर इसका प्रभाव दिखने लगता है। इस दौरान गर्भनिरोधक दवा के पूर्व प्रयोग के असर से भी त्वचा बेजान, अधिक संवेदनशील और ढीली हो जाती है। त्वचा की चमक गायब होने लगती है। इसलिए जरूरी है कि आप ऐसे प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें, जो एंटीऑक्सिडेंट हो और मिलेनिन को कम करता हो। मुलेठी का प्रयोग भी करें, यह भी इस उम्र में त्वचा के लिए लाभदायक है।
ब्लड शुगर रहेगा नियंत्रित
यह आम धारणा है कि डायबिटीज के मरीजों को व्यायाम करते वक्त ज्यादा वजन नहीं उठाना चाहिए, पर एक नए शोध में इस बात को गलत ठहराया गया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक नियमित व्यायाम और बढ़ती उम्र के साथ शरीर में सफेद मांसपेशियों में वृद्धि होती है। ये सफेद मांसपेशियां खून में शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद करती हैं। यह शोध यूनिवर्सिटी ऑफ मिशीगन के लाइफ साइंस इंस्टीटय़ूट द्वारा किया गया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक व्यायाम के दौरान जब हम भारी वजन उठाते हैं, उस वक्त हमारी मांसपेशियां सिकुड़ती हैं और इस प्रक्रिया में हमारी मांसपेशियां ग्लाइकोजेन का इस्तेमाल करती हैं, जिससे खून में शुगर की मात्रा नियंत्रित होती है।
डांस कीजिए, बुढ़ापा दूर भगाइए
माना जा रहा है कि 2030 तक दुनिया के हर आठवें व्यक्ति की उम्र 65 साल या इससे भी ज्यादा होगी। पूरी दुनिया के वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उम्र बढऩे के साथ ही साथ लोग स्वस्थ कैसे रह सकते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक कला की ओर रुझान बढऩे से बड़ी उम्र में होने वाली बीमारियों का इलाज संभव है। शोधकर्ताओं के मुताबिक ऐसे लोग जो नियमित रूप से डांस करते हैं, उनकी जिंदगी पहले से बेहतर हो जाती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक डांस में हर स्टेप की टाइमिंग बेहद उतार-चढ़ाव वाली होती है और इस तरह की गतिविधियों से ही इस उम्र में सक्रियता और ऊर्जा बनी रहती है।
क्या भूख पर लग सकती है लगाम?
क्या विज्ञान के जरिए भूख पर नियत्रंण पाया जा सकता है? मुमकिन है कि इस सवाल का जवाब हां में हो जाए। दरअसल, वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क में कोशिकाओं के एक ऐसे समूह की पहचान की है, जिसमें भूख को नियंत्रित करने की ताकत है। इन्हीं कोशिकाओं की वजह से खाने की आदत बिगड़ जाती है, जिससे मोटापा जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। ईस्ट एंग्लिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने अपने शोध में यह निष्कर्ष निकाला है कि भूख जन्म के समय से ही तय नहीं होती है। पहले माना जाता था कि भूख को नियंत्रित करने वाली तंत्रिका कोशिकाएं गर्भ में भ्रूण के विकास के दौरान ही बनती हैं और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है। लेकिन बड़े चूहों और गिलहरी पर किए गए शोध के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है कि भूख पर भी लगाम लगाई जा सकती है।
आलसी हैं तो इसमें आपका दोष नहीं
अगर आप आलसी हैं तो इसमें आपकी गलती नहीं है। एक नए शोध के मुताबिक लोग अनुवांशिक रूप से आलसी होते हैं। दरअसल, हमारी जीन्स में कुछ ऐसे खास गुण होते हैं, जिसकी वजह से हम ज्यादा सक्रिय या आलसी होते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ मिसौरी के शोधकर्ताओं ने यह शोध खास तरह के चूहों पर किया। शोध में ऐसे चूहों को शामिल किया गया, जो या तो बहुत ज्यादा आलसी थे या बहुत सक्रिय। इन चूहों पर किए गए अध्ययन के आधार पर शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष निकाला कि मनुष्यों में भी अनुवांशिकी इस बात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है कि हम व्यायाम करने या शारीरिक रूप से सक्रिय होने के लिए कितने प्रेरित होते हैं।
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